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NIA: एनआईए ने विशेष अदालत में किया खुलासा, केरल पीएफआई के नेता आईएस और अलकायदा के संपर्क में

Tue, 20 Dec 2022 11:04 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि

सार

एनआईए ने कहा कि पीएफआई द्वारा की गई देशद्रोही गतिविधियों के संबंध में अहम जानकारी डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। जांच में पीएफआई नेताओं द्वारा सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने जैसे कदमों का भी खुलासा हुआ है।  
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PFI, NIA - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद गिरफ्तार किए गए प्रतिबंधित संगठन के नेताओं के बारे में  कोच्चि में विशेष एनआईए कोर्ट में जानकारी दी। एनआईए ने बताया कि केरल में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेता इस्लामिक स्टेट (आईएस) और अल-कायदा के कुछ नेताओं के संपर्क में थे। इस दौरान एनआईए ने अदालत से संगठन पर बैन लगाने के बाद गिरफ्तार किए गए पीएफआई नेताओं के खिलाफ जांच के लिए और समय भी मांगा। 

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एनआईए ने आगे कहा कि आईएस और अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठन देश के राज्य विरोधी और धार्मिक आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल उन देशों में विध्वंसक गतिविधियों के लिए करते हैं जहां उनका सीधा संचालन संभव नहीं है। जांच में एनआईए को संकेत मिले हैं कि इन आतंकी संगठनों के नेता केरल में पीएफआई के नेताओं के संपर्क में थे। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता है। 

एनआईए ने कहा कि पीएफआई द्वारा की गई देशद्रोही गतिविधियों के संबंध में अहम जानकारी डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। जांच में पीएफआई नेताओं द्वारा सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने जैसे कदमों का भी खुलासा हुआ है। विशेष अदालत ने इस संबंध में एनआईए की दलीलों को सुनते हुए सबूतों को इकट्ठा करने और जांच के लिए अतिरिक्त समय दे दिया। जानकारी के मुताबिक, एनआईए को जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने के लिए 90 दिनों का और समय दिया गया है। 
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गौरतलब है कि यह मामला 22 सितंबर को देश भर में एक साथ छापेमारी के बाद पीएफआई के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने और बाद में उनकी गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ है। प्रतिबंधित संगठन के नेताओं पर  गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोच्चि में दर्ज मामले में 13 आरोपी हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाकर 180 दिन कर दी गई है।

PFI है क्या?
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। ये संगठन दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। पीएफआई का दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों यह संगठन सक्रिय है। देश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी पर बैन लगने के बाद पीएफआई का विस्तार तेजी से हुआ है। कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में इस संगठन की काफी पकड़ बताई जाती है। इसकी कई शाखाएं भी हैं। गठन के बाद से ही पीएफआई पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियां करने के आरोप लगते रहते हैं।

इस संगठन पर क्या आरोप हैं?
PFI एक कट्टरपंथी संगठन है। 2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी। NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।  यह संगठन मुस्लिमों पर धार्मिक कट्टरता थोपने और जबरन धर्मांतरण कराने का काम करता है। एनआईए ने पीएफआई पर  हथियार चलाने के लिए ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं यह संगठन युवाओं को कट्टर बनाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी उकसाता है। इसी साल सितंबर में केंद्र सरकार ने पीएफआई पर पांच साल के लिए बैन लगा दिया गया था।  

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