अफग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे में हमला
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काबुल स्थित गुरुद्वारे में इस साल 25 मार्च को हुए आतंकी हमले की जांच के लिए एनआईए की टीम अफगानिस्तान पहुंच गई है। एनआईए द्वारा विदेशी धरती पर जांच करने का यह पहला मामला है। इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खोरसान प्रोविंस ने ली थी। ये वही आतंकी समूह है जो कुछ वर्षों से भारत में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहा है। हमले की जांच के लिए एनआईए की टीम काबुल और उसके आसपास के क्षेत्रों में जाएगी। काबुल की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की मदद लेकर आतंकी समूह तक पहुंचा जाएगा।
काबुल के गुरुद्वारे में हुए हमले में 27 लोग मारे गए थे। यह एक आत्मघाती हमला था। मरने वालों में कई भारतीय भी शामिल थे। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी को इस मामले की जांच सौंपी थी। एनआईए की टीम अब अफगानिस्तान पहुंच चुकी है। टीम ने स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के अलावा भारतीय दूतावास के अधिकारियों से भी बातचीत की है।
गुरुद्वारे की सुरक्षा व्यवस्था, पूर्व में हमले का अलर्ट और इस्लामिक स्टेट खोरसान प्रोविंस आतंकी दस्ते, आदि की जानकारी जुटाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय.सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी संगठन से जुड़ी अहम सूचनाएं एनआईए के साथ साझा की हैं। आईएस के जिन गुर्गों ने इस हमले की साजिश रची थी, उनकी कुछ जानकारी भी मिली है।
अफगान स्पेशल फोर्स ने गुरुद्वारे पर आत्मघाती हमला करने वाले आतंकी को मार गिराया था। सूत्रों का कहना है कि उस हमलावर की पहचान मुहसिन के तौर पर हुई थी। उसका जन्म केरल में हुआ था। तीन साल पहले वह अफगानिस्तान पहुंच कर आईएस के आतंकवादियों में शामिल हो गया। एनआईए ने आईएस से जुड़े मामलों की जांच के लिए भारत के कई शहरों में छापेमारी की थी। जांच में सामने आया था कि कई लोग सोशल मीडिया के माध्यम से आईएस के लिए काम कर रहे थे।