भारत में आतंकी घटनाओं की जांच करने वाली एजेंसी के नाम एक कीर्तिमान दर्ज हुआ है। एनआईए के मुताबिक राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि लखनऊ और अहमदाबाद की विशेष अदालतों द्वारा दो अलग-अलग फैसलों में 10 अभियुक्तों को सजा सुनाए जाने के साथ ही एजेंसी की दोषसिद्धि दर 93.69 फीसदी हो गई है।
दोनों मामले आईएसआईएस के नाम पर लोगों को ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण और हिंसक जिहाद करने के साथ देश में आतंकी हमले करने के लिए उकसाने को लेकर थे। एनआईए की विशेष अदालत, लखनऊ ने आईएसआईएस कानपुर मामले में सोमवार को सात आरोपियों को मौत की सजा और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं एक अन्य एनआईए विशेष अदालत, अहमदाबाद ने आईएसआईएस-राजकोट-मामले में आईएसआईएस राजकोट मामले में दो से 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
इन आतंकियों को सुनाई सजा
प्रतिबंधित संगठन आईएसआईएस के आतंकी मोहम्मद फैसल, गौस मुहम्मद खान, मो. अजहर, आतिफ मुज्जफर, मो. दानिश, सैयद मीर हुसैन और आसिफ इकबाल उर्फ रॉकी को मृत्यु दंड की सजा, जबकि मो. आतिफ उर्फ आतिफ ईरानी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण पांडेय की कोर्ट ने सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया।
एनआईए ने कहा कि उसने एक और मील का पत्थर हासिल किया है। एनआईए ने कहा कि एजेंसी साक्ष्य-आधारित जांच वैज्ञानिक रूप से एकत्र किए गए कठिन सबूतों पर निर्भर करती है।
एनआईए ने कहा कि आरोपियों ने कुछ आईईडी तैयार कर उनके परीक्षण किए थे और उन्हें उत्तर प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर लगाने की असफल कोशिश की थी। जांच में आरोपियों के आईईडी बनाने और यहां तक कि हथियारों, गोला-बारूद और आईएसआईएस के झंडे के साथ कई तस्वीरों का पता चला है। समूह ने कथित तौर पर विभिन्न स्थानों से अवैध हथियार और विस्फोटक एकत्र किए थे।
7 मार्च, 2017 को ट्रेन विस्फोट हुआ था विस्फोट
आतिफ और तीन अन्य की पहचान एमडी दानिश, सैयद मीर हुसैन और मोहम्मद सैफुल्ला के रूप में की गई है, जो भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में लगाए गए आईईडी को बनाने के लिए जिम्मेदार थे। सभी आठ आरोपी उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। 7 मार्च, 2017 को ट्रेन विस्फोट में 10 लोग घायल हो गए थे। एनआईए ने कहा कि सभी आठ आईएसआईएस विचारधारा का प्रचार करने और भारत में अपनी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आए थे।
फैसल, आतिफ और सैफुल्ला ने कुछ आतंकवादी समूहों से संपर्क करने के लिए मार्च 2016 में कश्मीर की यात्रा की थी, जो उन्हें पाकिस्तान जाने में मदद कर सकते थे, जहां से वे सीरिया में आईएसआईएस-नियंत्रित क्षेत्रों में जा सकते थे। एक अन्य आरोपी सैफुल्ला 7 मार्च, 2017 को हाजी कॉलोनी में उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के साथ मुठभेड़ में मारा गया था।
मामला शुरू में लखनऊ एटीएस द्वारा 8 मार्च, 2017 को दर्ज किया गया था और 14 मार्च, 2017 को एनआईए द्वारा फिर से दर्ज किया गया था। जांच के बाद, एनआईए ने कहा, 31 अगस्त, 2017 को आठ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था। मुकदमे के बाद, इस साल 24 फरवरी को आठ आरोपी व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया था।