राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बंगलूरू इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तमिलनाडु हिज्ब उत तहरीर मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजीज अहमद उर्फ जलील अजीज अहमद के रूप में हुई है। आरोपी विदेश भागने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही बंगलूरू एयरपोर्ट से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हिज्ब उत तहरीर एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है, जिसका उद्देश्य कट्टरपंथी युवाओं की फौज तैयार करके भारत में इस्लामी शासन को लागू करना है।
कट्टरपंथी युवाओं की फौज तैयार करने की रच रहा था साजिश
आरोपी अजीज अहमद पर आरोप है कि वह युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भारत में इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की साजिश में शामिल है। तमिलनाडु मामले में एनआईए ने छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये आरोपी भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें हिज्ब उत तहरीर की विचारधारा से जोड़ते हैं। ये चरमपंथी संगठन देश में खिलाफत लाने के लिए भारत विरोधी ताकतों से सैन्य सहायता (नुसरा) मांगता है। एनआईए इस मामले में जांच जारी है। यरुशलम में हिज्ब-उत-तहरीर को 1952 में गठित किया गया था। इसका प्रभाव यूरोप, एशिया, दक्षिण एशिया में है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव इंडोनेशिया में है।
मध्य प्रदेश में हुआ था भंडाफोड़
इस्लामी कट्टरपंथी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर जिहाद के लिए युवाओं को भड़काऊ तकरीरें सुनाता है। उनके कट्टरपंथी बनने के बाद उनको हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। आरोप है कि ये संगठन युवाओं को जैविक हथियार बनाने की ट्रेनिंग भी दे रहा है। हिज्ब-उत-तहरीर अपनी इस मुहिम के पहले चरण में दूसरे धर्म के युवकों को भी धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनाता है। इस कट्टरपंथी संगठन की पोल तब खुली, जब मध्य प्रदेश के आतंकवाद-रोधी स्क्वायड और एनआईए ने हिज्ब-उत-तहरीर के 16 लोगों को गिरफ्तार किया। जब इनसे पूछताछ की गई तो इन्होंने हिज्ब के काम करने का तरीका बताया। हिज्ब-उत-तहरीर के पकड़े गए 16 लोगों में से 8 लोग पहले हिंदू थे, जिनका धर्म परिवर्तन कराया गया। इसके बाद इन्हें जिहाद का प्रशिक्षण दिया गया।