राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मांगी रिपोर्ट
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वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का सख्त रवैया कायम है। एनजीटी ने फिर से आठ राज्यों के प्रमुख 15 शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति, आबादी और वाहनों की संख्या के स्पष्ट और पुख्ता आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ व इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। बेंच ने कहा कि यदि राज्य आज (मंगलवार) को आंकड़े और तथ्य पेश करने में विफल होते हैं तो संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जाएगा।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच का यह निर्देश संबंधित राज्यों की ओर से मोहलत मांगे जाने और भ्रामक आंकड़ों को पेश किए जाने के बाद आया है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्यों की ओर से वायु प्रदूषण की स्थिति रिपोर्ट पेश की गई थी। यह रिपोर्ट अधूरी थी, लिहाजा बेंच ने प्राधिकरण और राज्यों को फटकार भी लगाई।
बेंच ने कहा रिपोर्ट नहीं अव्वल दर्जे का मजाक है यह
बेंच ने सीपीसीबी को फटकार लगाते हुए कहा कि यह कैसी रिपोर्ट है। आपकी रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई की आबादी महज 11 लाख है। वहीं दिल्ली में प्रति किलोमीटर पर 245 वाहन मौजूद हैं। यह रिपोर्ट नहीं अव्वल दर्जे का मजाक है। आप मौजूदा समय 1960 की फिएट कार भी सड़कों पर देख सकते हैं। दिल्ली में लोगों के पास मारूति 800 भी मौजूद है। न वाहन न प्रदूषण दोनों आप लोगों को दिखाई नहीं देता। वहीं बेंच ने दिल्ली आरटीओ को भी पेश होने का निर्देश दिया है। बेंच ने कहा कि वे बताएं कि राष्ट्रीय राजधानी में डीजल-पेट्रोल वाहनों की संख्या कितनी है।
मोहलत मांगते ही यूपी को पड़ी फटकार
कई राज्य हैं प्रदुषित
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बेंच ने मामले में संबंधित राज्य महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पंजाब से मुंबई, पुणे, कोलकाता, बंग्लुरू, पटना, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, वाराणसी, नागपुर, चेन्नई, हैदराबाद, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर जैसे प्रमुख शहरों की वायु प्रदूषण स्थिति और जनसंख्या व वाहनों की संख्या के आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया है। इससे पहले बीती सुनवाई में भी इन राज्यों से एनजीटी ने आंकड़ों की मांग की थी।
एनजीटी ने सभी राज्यों से कहा है कि वह प्रमुख शहरों के जनसंख्या आंकड़े हाल ही में सपन्न हुई जनगणना 2011 के आधार पर और वाहनों की संख्या पेट्रोल और डीजल में वर्गीकृत कर बेंच के सामने पेश करें। सोमवार को सुनवाई के दौरान बेंच ने राज्यों से प्रदूषण फैलाने वाले दो पहिया, तीन पहिया वाहनों के आंकड़े भी अलग से पेश करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें इन सभी आंकड़ों पर निर्देश लेने का वक्त चाहिए। इस पर बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि आपको हमेशा मोहलत चाहिए। पूर्व आदेश के बाद भी क्यों नहीं आंकड़े तैयार हैं। वहीं, महाराष्ट्र की तरफ से पेश किए गए भ्रामक आंकड़ों पर ट्रिब्यूनल ने कहा कि पेश किए आंकड़ों के मुताबिक मुंबई सबसे सबसे प्रदूषित शहर है। राज्य साफ आंकड़े मंगलवार को पेश करें।