पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एसईआईएए पंजाब, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों एवं मोहाली के जिलाधिकारी की पांच सदस्यीय संयुक्त समिति बनाई है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने मोहाली में रियल एस्टेट कंपनी ओमेक्स लिमिटेड के निर्माणों की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर रिपोर्ट देने के लिए एक समिति गठित की है। अपने आदेश में एनजीटी ने कहा कि तथ्यात्मक स्थिति तथा वैधानिक निकायों एवं परियोजना प्रस्तावक द्वारा अपनाए गए रुख का पता लगाना जरूरी है।
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एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एसईआईएए पंजाब, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों एवं मोहाली के जिलाधिकारी की पांच सदस्यीय संयुक्त समिति बनाई है। पीठ ने कहा कि समिति 15 दिन में बैठक कर सकती है।
वह संबंधित स्थल का दौरा कर सकती है और परियोजना प्रस्तावक समेत संबंधित पक्षकारों के साथ संवाद कर सकती है। समिति को किसी अन्य विशेषज्ञ/ संगठन से परामर्श करने की छूट होगी। पीठ ने कहा कि समिति दो महीने के अंदर ई-मेल के माध्यम से अपनी रिपोर्ट दे सकती है।
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एनजीटी पंजाब निवासी संदीप सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। उन्होंने चंडीगढ़ के समीप मोहाली जिले के मुल्लानपुर में कांसल, रानी माजरा, ढूडे माजरा एवं रसूलगांव में ‘द लेक’ परियोजना के माध्यम से ओमेक्स एवं ओमेक्स चंडीगढ़ एक्सटेंशन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए निर्माण और इसी बिल्डर की अन्य संरचनाओं की कानूनी वैधता को चुनौती दी है।