नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि राजधानी दिल्ली में वर्षा जल संचयन प्रणाली नहीं लगाने वाले संस्थानों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को इसकी वसूली करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी अध्यक्ष न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पाया कि कुछ संस्थानों को छोड़कर ज्यादातर स्कूलों एवं कॉलेजों में पर्याप्त मात्रा में वर्षा जल संचय की प्रणाली लगी हुई है।
ट्रिब्यूनल को बताया गया कि उसके द्वारा गठित निगरानी समिति ने स्कूलों एवं कॉलेजों में वर्षा जल संचयन लागू करने के बाद दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, डीएमआरसी के अधीन इमारतों में इसे लागू कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
31 अक्तूबर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक डीएमआरसी को कई स्थानों पर वर्षा जल संचयन इकाई लगाने की जरूरत है। डीएमआरसी ने 236 में से 185 जगह पर इसे लगा दिया है जबकि 45 स्थानों पर यह संभव नहीं हो पाया। आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इसके साथ ही एनजीटी ने जल निकायों के पुनरुद्धार, भूजल के अवैध दोहन और उपचारित पानी का उपयोग करने में विफलता के लिए जुर्माना लगाने के लिए कई दिशा-निर्देश भी दिए। पीठ ने कहा, कि 31 मार्च 2021 तक जल निकायों के पुनरुद्धार में असफल रहने पर प्रति माह 50,000 रुपये का जुर्माना देय होगा। इसे सीपीसीबी द्वारा वसूला जाएगा।