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SC: गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी को; बिलकिस बानो केस में गुजरात सरकार की याचिका खारिज

Thu, 26 Sep 2024 07:17 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गुजरात में 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगा  दी गई थी। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य में दंगे हुए थे।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में सुनवाई के लिए 15 जनवरी 2025 की तारीख तय की है। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और राजेश बिंदल की खंडपीठ ने अगली तारीख में इस मामले में कोई स्थगन आदेश नहीं दिया जाएगा। 

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गुजरात में 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगा  दी गई थी। इसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य में दंगे हुए थे। मामले को लेकर  गुजरात उच्च न्यायालय के अक्तूबर 2017 के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में कई अपीलें दायर की गईं थीं।  इसमें कई दोषियों की सजा को बरकरार रखा गया था और 11 की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।

गुजरात सरकार ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट से  11 दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की थी, जिनकी सजा को आजीवन कारावास में बदला गया था। गुरुवार को शीर्ष अदालत में गुजरात सरकार की वकील स्वाति घिल्डियाल ने पीठ से मामले की सुनवाई किसी और दिन करने का अनुरोध किया। 
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इस पर पीठ ने कहा कि हमें सभी व्यक्तियों और अभियोजन पक्ष के मामले समझने होंगे। इस मामले में सुनवाई में कम से कम तीन दिन लगेंगे। इसलिए मामले को अब अगली तारीख पर स्थगित नहीं किया जाएगा। 15 जनवरी 2025 को मामले की सुनवाई होगी। 

बिलकिस बानो मामले में सरकार की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिलकिस बानो दुष्कर्म और हत्या और 2002 के दंगों के दौरान उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या मामले में दोषी 11 लोगों को सजा में दी गई छूट को रद्द करने की मांग वाली गुजरात सरकार की याचिका खारिज कर दी। 

न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने याचिका को खुली अदालत में सुनवाई करने के आवेदन को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा याचिकाओं, चुनौती के तहत आदेश और उसके साथ संलग्न कागजात को ध्यान से देखने के बाद हम संतुष्ट हैं कि रिकॉर्ड पर स्पष्ट रूप से कोई त्रुटि नहीं है। इसलिए समीक्षा याचिकाएं खारिज की जाती हैं।

गुजरात सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि आठ जनवरी के फैसले में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी। इसमें राज्य को सत्ता हड़पने और शीर्ष अदालत की अन्य पीठ के आदेश का पालन करने के लिए विवेकाधिकार का दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया था। सरकार ने कहा था कि इन टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी। 
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