मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, कर्नाटक के पूर्व डीजीपी सूद ने 25 मई को एजेंसी की बागडोर संभाली थी। इसके तुरंत बाद उन्होंने एजेंसी के संचालन की जमीनी स्तर की समझ हासिल करने के लिए एक मिशन शुरू किया था।
उन्होंने बताया कि अपने दौरों के दौरान सूद सभी स्टाफ सदस्यों के साथ व्यक्तिगत बातचीत को प्राथमिकता देते हैं, उनकी चिंताओं और विचारों को सुनते हैं और यहां तक कि उनके साथ रोटी भी तोड़ते हैं। अधिकारियों ने कहा कि इन सत्रों से उन्हें देशभर में सीबीआई के कामकाज और कर्मियों की 'मन:स्थिति' के बारे में 'जमीनी हकीकत' की पहचान करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि इन सत्रों के दौरान समन जारी करने, खुफिया जानकारी जुटाने, शिकायतकर्ताओं से निपटने, जाल बिछाने और कर्मचारियों की कमी जैसे कई मुद्दों को निदेशक के संज्ञान में लाया गया है, जिसमें सबसे निचले स्तर के अधिकारियों को भी उनसे बातचीत करने का मौका दिया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि निदेशक का मानना है कि जमीनी स्तर पर एजेंसी के सामने आने वाले मुद्दों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी हासिल करने के लिए 'टॉप टू डाउन' शाखाओं में कनिष्ठ अधिकारियों से मिलने जितना प्रभावी नहीं है। उन्होंने बताया कि सूद ने 15 अक्तूबर तक देशभर में फैली सीबीआई की 58 शाखाओं में से प्रत्येक का दौरा करने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि कार्यभार संभालने के शुरुआती महीनों में इन यात्राओं से सीबीआई निदेशक को एजेंसी में अपने कार्यकाल के दौरान नीतियां बनाने और एजेंसी के भीतर प्रशासनिक सुधार लाने में मदद मिलने की संभावना है।