नीट में अंकों पर हुइ धांधली के मुद्दे पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला तेज कर दिया है। शुक्रवार को इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'चुप्पी' पर सवाल उठाया और कहा कि केवल सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में फोरेंसिक जांच ही लाखों युवा छात्रों के भविष्य की रक्षा कर सकती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से 'नीट घोटाले को ढंकना' शुरू कर दिया है।
केंद्र और एनटीए ने बृहस्पतिवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उन्होंने एमबीबीएस और ऐसे अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा देने वाले 1,563 उम्मीदवारों को दिए गए ग्रेस मार्क्स रद्द कर दिए हैं। केंद्र ने कहा था कि उनके पास या तो दोबारा परीक्षा देने या समय की हानि के लिए उन्हें दिए गए प्रतिपूरक अंकों को छोड़ने का विकल्प होगा। वहीं इस मामले पर पीएम मोदी खामोश बने हुए हैं। उनकी खामोशी पर मोदी सरकार ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यहां अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में दावा किया कि "नीट घोटाला व्यापम 2.0 है" और मोदी सरकार इसे सफेद करना चाहती है। व्यापम या मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल में घोटाला 2013 में सामने आया था। इस घोटाले में उम्मीदवारों ने अधिकारियों को रिश्वत दी थी। उत्तर पुस्तिकाएं लिखने के लिए जालसाजों को नियुक्त करके परीक्षा में धांधली की थी।
बता दें कि नीट में अंकों में हुई गड़बड़ी के बाद लाखों छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों में भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर आक्रोश था। पवन खेड़ा ने कहा कि व्यापक विरोध प्रदर्शन, कई अदालती मामले और छात्रों के जबरदस्त आक्रोश को "प्रेरित" बताने का शिक्षा मंत्री का बयान 24 लाख युवा उम्मीदवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सरकार इन युवाओं का भविष्य बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने पूछा कि पीएम मोदी और प्रधान बताएं क्या यह सच नहीं है कि पटना पुलिस (बिहार) की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) जो एनईईटी-यूजी 2024 पेपर लीक की जांच कर रही है। जिसमें उन्होंने पता चला था कि मेडिकल उम्मीदवारों ने 5 मई को होने वाली परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लेने के लिए रैकेट में शामिल 'दलालों' को 30 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक की बड़ी रकम का भुगतान किया था।
पवन खेड़ा ने पूछा कि "क्या शिक्षा मंत्री इस बात से इनकार कर सकते हैं कि गुजरात के गोधरा में एक कोचिंग सेंटर चलाने वाले व्यक्ति, एक शिक्षक और एक अन्य सहित तीन लोगों की संलिप्तता वाले एक एनईईटी-यूजी धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। मामले की जांच में छात्रों, उनके अभिभावकों और आरोपियों के बीच 12 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है?" उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि इस साल, 2024 में, 67 टॉपर्स थे, जिन्हें 720 का परफेक्ट स्कोर दिया गया था, जबकि 2023 में सिर्फ 2 छात्रों को परफेक्ट स्कोर मिला था। क्या यह सच नहीं है कि नीट के नतीजे 10 दिन पहले घोषित किए गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खामोश रहने पर सवाल
पवन खेड़ा ने सवाल दागा कि "पीएम मोदी हमेशा मूकदर्शक नहीं रह सकते। जब 24 लाख युवाओं का भविष्य दांव पर है तो वे चुप क्यों हैं?" उन्होंने पूछा कि मोदी सरकार और एनटीए ने इस साल रैंक के मुकाबले अंकों को क्यों "बढ़ाया"। उन्होंने कहा, "अगर मोदी सरकार दावा करती है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी है, तो 580 से ज़्यादा अंक पाने वाले छात्रों के पिछले साल और इस साल के पूरे नतीजे एनटीए द्वारा सार्वजनिक किए जाने चाहिए। 580 से ज्यादा अंक पाने वाले छात्रों के केंद्रों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। ताकि पता चल सके कि कितने छात्र नीट देने के लिए अपने घर से दूर गए थे।"
सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में फॉरेंसिक जांच की मांग
पवन खेड़ा ने कहा कि बोर्ड के अंकों को पिछले साल और इस साल के नीट अंकों के साथ सहसंबंधित किया जाना चाहिए ताकि यह देखा जा सके कि डेटा कितना सहसंबंधित है। उन्होंने कहा, "जिन केंद्रों पर बड़े स्कोरर हैं, उनके वीडियो जारी किए जाने चाहिए। जिससे इस घोटाले की पहचान हो सके कि ओएमआर परीक्षा के बाद या एनटीए कार्यालय में भरा गया था या कोई अन्य व्यक्ति किसी और की नकल कर रहा था। खेड़ा ने जोर देकर कहा कि लाखों युवा छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए केवल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में फोरेंसिक जांच ही एक समाधान है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर दागे सवाल
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "अगर नीट में पेपर लीक नहीं हुआ था तो - बिहार में पेपर लीक के कारण 13 आरोपियों को क्यों गिरफ्तार किया गया? क्या पटना पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने शिक्षा माफिया और रैकेट में शामिल संगठित गिरोहों को पेपर के बदले 30 लाख रुपये से 50 लाख रुपये के भुगतान का खुलासा नहीं किया?" "क्या गुजरात के गोधरा में नीट-यूजी धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ नहीं हुआ है? जिसमें एक कोचिंग सेंटर चलाने वाला व्यक्ति, एक शिक्षक और एक अन्य व्यक्ति सहित तीन लोग शामिल हैं और गुजरात पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बीच 12 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन सामने आया है?" उन्होंने मोदी सरकार से सवाल पूछा कि पूछा कि अगर मोदी सरकार के मुताबिक नीट में कोई पेपर लीक नहीं हुआ तो ये गिरफ्तारियां क्यों की गईं। उन्होंने कहा, "इससे क्या निष्कर्ष निकलता है? क्या मोदी सरकार पहले या अब देश के लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही थी? मोदी सरकार ने 24 लाख युवाओं की आकांक्षाओं को कुचल दिया है।"
रैंक में धांधली का लगाया आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि चौबीस लाख युवा डॉक्टर बनने के लिए नीट परीक्षा देते हैं और एक लाख मेडिकल सीटों के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। आरोप लगाया कि "इन एक लाख सीटों में से करीब 55,000 सीटें सरकारी कॉलेजों में हैं। यहां एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के लिए सीटें आरक्षित हैं। लेकिन इस बार मोदी सरकार ने एनटीए का दुरुपयोग किया है। अंकों और रैंक में बड़े पैमाने पर धांधली की है, जिसके कारण आरक्षित सीटों के लिए कट-ऑफ भी बढ़ गया है।" उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मेधावी छात्रों को रियायती दरों पर सरकारी प्रवेश पाने से वंचित करने के लिए ग्रेस मार्क्स, पेपर लीक और धांधली का खेल खेला गया।