अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा में अलग—अलग सवाल पूछे जाने को लेकर संकटों का सामना कर रही नीट 2017 की परीक्षा के दोबारा होने के आसार बेहद कम है। केंद्र सरकार का मूड इस परीक्षा को दोबारा से कराने के पक्ष में नहीं है।
मामला गुजरात और मद्रास हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद केंद्र के स्वास्थ्य और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस पर गहन मंत्रणा की है। दोनों ही मंत्रालय नीट परीक्षा दोबारा से आयोजित करने के पक्ष में नहीं है।
मंत्रणा में शामिल एक शीर्ष नौकरशाह के अनुसार परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने के फैसले से यह हमेशा के लिए परिपाटी बन जाएगी। न्यायालय के आदेश के बाद पिछले वर्ष 2016 से नीट परीक्षा के आयोजन की शुरूआत हुई है।
बीते वर्ष भी खामियों के वजह से नीट परीक्षा दोबारा आयोजित करनी पडी थी। दरअसल परीक्षा के आयोजन का जिम्मा सीबीएसई के उपर है। जोकि केंद्र के मानव संसाधन मंत्रालय के अधिन आता है।
कोर्ट क्यों पहुंचा है नीट का मामला
7 मई को सीबीएसई के जरिए आयोजित नीट की परीक्षा का मामला गुजराती, तमिल और अंग्रेजी में अलग-अलग प्रश्नपत्र होने के वजह से पहुंचा है। इन राज्यों में परीक्षा का विरोध करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों ने मामला कोर्ट में पहुंचा दिया है।
बच्चों के साथ मिलकर अभिभावकों ने गुजरात और तमिलनाडू हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और गुहार लगाई है कि उनके बच्चों के साथ सीबीएसई ने अन्याय किया है। उनकी मांग है कि या तो नीट फिर से हो या फिर उनके लिए पेरीटी के मापदंड तय किए जाएं। अब सारे छात्रों की निगाहें हाईकोर्ट पर टिकी हैं।
तमिलनाडू कोर्ट ने सीबीएसई से परीक्षा के परिणाम पर रोक लगाने के साथ सफाई मांगी है। तो गुजरात कोर्ट ने भी सीबीएसई और एमसीआई से पक्ष पूछा है। लेकिन सरकार का रूख छात्र हितों के खिलाफ नजर आ रहा है।