गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक देश की जेलों में कैदियों की भरमार मची है। साल 2015 से 2017 तक के आंकड़े देखें तो सबसे बुरा हाल उत्तर प्रदेश का है जहां क्षमता से करीब 40 हजार अधिक कैदी सजा काट रहे हैं।
यूपी की 70 जेलों में 31 दिसंबर 2017 को 96383 कैदी बंद थे, जबकि इन जेलों की क्षमता महज 58400 कैदियों की थी। बता दें कि यूपी की जेलों मे पूरे देश की तुलना में सबसे अधिक 14.9 फीसदी कैदियों की क्षमता है।
रिपोर्ट के मुताबिक जेल की कुल 1361 जेलों में करीब साढ़े चार लाख कैदी सजा काट रहे थे। जिनमें 4,31,283 पुरुष और 18873 महिला कैदी थीं। यह संख्या जेलों की कुल क्षमता से 60 हजार अधिक थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2015 से 2017 के बीच जेलों की क्षमता में जहां 6.8 फीसदी का इजाफा हुआ वहीं कैदियों की संख्या 7.4 फीसदी तक बढ़ गई। अधिग्रहण दर के लिहाज से देखें तो यूपी सर्वाधिक 165 फीसदी के साथ पहले स्थान पर है।
इसके बाद छत्तीसगढ़ 157.23 फीसदी के साथ दूसरे और 151.22 फीसदी के साथ दिल्ली तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक कैदियों की संख्या में तेजी से हुए इजाफे के कारण देश भर की अधिग्रहण दर 2015 में 114.4 फीसदी से बढ़कर 2017 में 115.1 हो गई।
देशभर की जेलों में यूं बढ़े कैदी
| साल |
कैदी (लाख में) |
कितनी बढ़ी क्षमता (लाख में) |
| 2015 |
4.19 |
3.66 |
| 2016 |
4.33 |
3.80 |
| 2017 |
4.50 |
3.91 |
अकेले छह राज्यों में 56.8 फीसदी कैदी
देश के कुल कैदियों का 56.8 फीसदी अकेले छह राज्यों की जेल में बंद हैं। इनमें यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। 2017 के अंत तक यूपी के बाद बिहार में सबसे अधिक 58 जेलों में 40186 कैदी बंद थे। तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश की 123 जेलों में 38708 कैदी थे। वहीं महाराष्ट्र में 33699, पंजाब में 24048 और पश्चिम बंगाल में 23092 कैदी बंद थे।