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NCPCR: बंगाल में बाल संरक्षण के मुद्दों पर राष्ट्रपति को सौंपी गई रिपोर्ट, राज्य के रवैये पर जताई गई चिंता

Tue, 19 Mar 2024 08:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

NCPCR: एनसीपीसीआर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पश्चिम बंगाल पर एक रिपोर्ट सौंपी। जिसमें बच्चों के अधिकारों से जुड़े कानूनों की अनुपालना को लेकर राज्य के रवैये पर चिंता जताई गई है। 
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संक्षरण आयोग (एनसीपीसीआर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पश्चिम बंगाल पर एक रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कहा गया है कि राज्य प्रशासन ने कथित रूप से बच्चों के हितों को बनाए रखने की उपेक्षा की और बच्चों से जुड़े विभिन्न अधिनियमों के तहत कानूनी शासनादेशों की अनुपालना को सुनिश्चित नहीं किया। 

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इस रिपोर्ट को पिछले साल 21 दिसंबर को पहले राज्यसभा और बाद में 2 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया था। आज एक शिष्टाचार बैठक के दौरान इसे औपचारिक रूप से राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपा गया। 

इसमें कहा गया है कि एनसीपीसीआर ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए पॉक्सो अधिनियम 2012, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 जैसे महत्वपूर्ण अधिनियमों के क्रियान्वयन के प्रति राज्य के दृष्टिकोण में विसंगतियां देखीं। आयोग ने राज्यभर में बम धमाकों की घटनाओं में पीड़ित के रूप में बच्चों की संख्या पर भी चिंता जताई। 

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि राज्य सरकार को केंद्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहिए,ताकि जघन्य अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। रिपोर्ट में इसके भी उदाहरण दिए गए हैं कि किस तरह से 2021 के चुनावों के समापन के बाद बच्चों को निशाना बनाया गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। आयोग ने रिपोर्ट में दावा किया कि उसने चुनाव के बाद हिंसा के कुल 23 मामलों का दस्तावेजीकरण किया है। 
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रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में बाल तस्करी के मामलों का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा, इसमें यह भी दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री सहित राज्य के अधिकारियों द्वारा यौन शोषण के संबंध में असंवेदनशील टिप्पणियां की गईं, जो पॉक्सो अधिनियम 2012 के उल्लंघन का संकेत देती हैं। 
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