दरअसल, अरविंद केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट तक बिजली बिल और पानी मुफ्त कर महिलाओं को अपनी ओर करने में सफलता पाई है। इसी प्रकार दिल्ली की बसों में महिलाओं के लिए टिकट फ्री कर केजरीवाल सरकार ने महिलाओं को अपने पक्ष में किया है। इससे वह इनके बीच खासी लोकप्रिय हुई है।
महिलाओं का अपमान किया- भाजपा
लेकिन भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने महिलाओं का अपमान किया है। दिल्ली भाजपा में मंत्री सारिका जैन ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल महिलाओं का सम्मान नहीं करती। वह कुछ चीजें फ्री कर उसका वोट लेने की सोच रखती है, लेकिन उसी महिला के घर के बगल में शराब के ठेके खोलने का आदेश दे देती है जिससे महिलाओं का सुरक्षा और सम्मान खतरे में पड़ जाता है।
सारिका जैन ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपने मंत्रिमंडल में अब तक किसी महिला को स्थान नहीं दिया था। आतिशी के रूप में उन्होंने केवल एक महिला को तब स्थान दिया जब उनके दो-दो मंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में जेल चले गए। यदि केजरीवाल महिलाओं का सम्मान करते तो उनके मंत्रिमंडल में कम से कम तीन महिला मंत्री होनी चाहिए थी। यह दिखाता है कि केजरीवाल को महिलाओं की क्षमता पर संदेह है। उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में महिलाएं अरविंद केजरीवाल सरकार को सबक सिखाएंगीं।
अरविंद केजरीवाल को महिलाओं के सुरक्षा की चिंता
आम आदमी पार्टी की नेता मालविका साहनी ने अमर उजाला से कहा कि यह अच्छा कदम है। उच्च वर्ग की महिलाएं अपना लक्ष्य हासिल कर लेती हैं लेकिन गरीब समुदाय की महिलाएं अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती हैं। आरक्षण मिलने से वह अपनी मनचाही मंजिल हासिल कर सकेंगे।
मालविका साहनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए की महिला आरक्षण बिल पास कर देने से वह दिल्ली में काबिज हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल महिलाओं की सुख, सुविधा और सुरक्षा के लिए लगाकर चिंतित रहते हैं। उन्होंने विभिन्न मुफ्त योजनाओं के सहारे महिलाओं को सशक्त करने का काम किया है। बसों में मार्शल लगाकर, पैनिक बटन और जगह-जगह पर कैमरे लगाकर उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा की चिंता की है, इसलिए दिल्ली की महिलाओं का साथ अरविंद केजरीवाल के साथ बना रहेगा।
50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं को मैदान में उतारा
हालांकि, एक सच्चाई यह भी है कि हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों ही दलों ने 50 प्रतिशत से ज्यादा महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा। कानून के अनुसार 250 सदस्यों वाले दिल्ली नगर निगम में सभी दलों को 125 महिला प्रत्याशियों को टिकट देना आवश्यक था, लेकिन दोनों प्रमुख दलों ने इससे आगे बढ़कर लगभग 130 महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा।