भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा था ‘ ही इज मोस्ट क्रिटिसाइज्ड मैन इन इंडियन पॉलिटिक्स’। यह बात सच भी है। जब मोदी देश के शक्तिशाली नेता के तौर पर उभर रहे थे तब न तो कोई ऐसी राजनीतिक पार्टी थी और न मीडिया जिसने मोदी पर हमला नहीं किया हो। लेकिन मोदी इन हमलों से और ताकतवर होते चले गए। मोदी के आलोचक और समर्थक दोनों एक मत से मानते हैं कि भाजपा में मोदी का कद अब इतना ऊंचा हो गया है कि अब अक्सर ये कहा जाने लगा है कि मोदी भाजपा और भाजपा मोदी हो गए हैं।
राजनीति के जानकार कहते हैं कि मोदी की ताकत पॉलिटकल मार्केटिंग हैं और इसकी बदौलत वे चुनाव में जीत दिलवाने वाले ‘मोदी ब्रांड’ हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के सात साल पूरे हो चुके हैं और मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा साल भी 30 मई को पूरा हो चुका है। मोदी जैसे ही केंद्र की सत्ता पर आसीन हुए भाजपा के अच्छे दिन आ गए।
मोदी का चेहरा आगे करके भाजपा एक-एक करके कई राज्यों में चुनाव जीतती गई और उसका सियासी ग्राफ बढ़ता गया। 2014 में मोदी के आने के बाद 2018 तक देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी। इस समय भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकार वाले प्रदेशों की संख्या 18 है। इससे पहले इंदिरा गांधी के समय में कांग्रेस की 17 राज्यों में सरकार थी।
मोदी ने जीत दिलाने वाली इमेज बना ली
संघ के प्रचारक रहे गोंविदाचार्य ने एक बयान में कहा-मोदी संघ के दूसरे प्रचारकों की तरह कभी चुपचाप काम करने वाले नहीं रहे। वे काम भी पूरी ताकत के साथ करते हैं और उसकी मार्केटिंग भी। उनके मुताबिक एक नेता को बड़ा बनने के लिए तीन जरूरी बातें हैं, विपरीत परिस्थितियों में खुद को मजबूती से खड़ा करने के लिए पूरी तैयारी, तकनीक और साधन। विपरीत परिस्थितियों में खड़ा रखने के लिए संघ का संगठन उनकी पूरी मदद करता है और अब उनके पास सोशल मीडिया की भी ताकत है और मोदी के पास सत्ता तक पहुंचने की बेहतर राजनीतिक समझ है।
उनका मानना रहा कि मोदी चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दते हैं। मोदी पॉलिटिक्स का मतलब सिर्फ पावर समझते हैं और पावर के लिए जरूरी है चुनावों में जीत और जीत बेहतर इमेज से बनती है। मोदी ने यह इमेज बना ली है इसलिए वे अक्सर भाजपा को जीत दिला देते हैं।
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