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Nagarjuna Sagar: '28 नवंबर तक बांध से पानी छोड़ें राज्य'; पानी पर रार के बीच आंध्र-तेलंगाना से केंद्र की अपील

Sat, 02 Dec 2023 04:19 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नागार्जुन सागर डैम से पानी के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में टकराव की खबरें हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने पीने के पानी को लेकर उपजे विवाद के बीच बड़ा कदम कदम उठाया है। केंद्र ने दोनों राज्यों से 28 नवंबर तक पानी छोड़ने की अपील की है।
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नागार्जुन सागर डैम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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पीने के पानी के मुद्दे पर दो राज्यों का तनाव बढ़ने की आशंका है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस योजना को लेकर हस्तक्षेप किया है । केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों से 28 नवंबर तक नागार्जुन सागर का पानी छोड़ने का आग्रह किया है। बता दें कि बीते 30 नवंबर को समाप्त हुए तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने से कुछ ही घंटे पहले, आंध्र प्रदेश ने नागार्जुन सागर बांध का कार्यभार अपने हाथ में ले लिया और पानी छोड़े जाने की शुरुआत भी कर दी। इससे दोनों राज्यों के बीच तनाव पैदा हो गया।
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खबरों के मुताबिक गुरुवार दोपहर करीब दो बजे तेलंगाना के अधिकांश अधिकारी चुनावों में व्यस्त थे। आंध्र प्रदेश पुलिस के लगभग 700 जवान नागार्जुन सागर परियोजना जाकर कार्यभार अपने हाथों में ले लिया। पुलिस ने डैम का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के बाद प्रति घंटे 500 क्यूसेक  पानी छोड़ने के लिए दाहिनी नहर खोल दी। आंध्र प्रदेश के सिंचाई मंत्री अंबाती रामबाबू ने "हम पीने के पानी के लिए कृष्णा नदी पर नागार्जुनसागर दाहिनी नहर से पानी छोड़ रहे हैं।"

नागार्जुन सागर बांध को लेकर गुरुवार को जैसे ही सिंचाई मंत्री का बयान दिखा, मामला तूल पकड़ने लगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर संदेश लिखने के बाद सिंचाई मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल वही पानी लिया है जिसका उन्हें अधिकार है। मंत्री का कहना है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच संधि के अनुसार उन्होंने नागार्जुन सागर बांध का पानी लिया।
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सिंचाई मंत्री रामबाबू ने कहा, "हमने किसी भी संधि का उल्लंघन नहीं किया है। कृष्णा नदी का 66% पानी आंध्र प्रदेश का है और 34% तेलंगाना का है। हमने पानी की एक भी बूंद का उपयोग नहीं किया है जो हमारा नहीं है। हमने अपने क्षेत्र में अपनी नहर खोलने की कोशिश की। यह पानी सही मायनों में हमारा है।'' 

बांध के पानी का बंटवारा और बढ़ते तनाव को देखते हुए, केंद्र सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों से 28 नवंबर तक नागार्जुन सागर का पानी छोड़ने का आग्रह किया है। यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के साथ वर्चुअल बैठक के दौरान रखा। खबरों के मुताबिक दोनों राज्य इस योजना पर सहमत हो गए हैं।

भविष्य में किसी भी तरह के संघर्ष से बचने के लिए नागार्जुन सागर बांध की निगरानी का काम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंपा गया है। सीआरपीएफ यह भी देखेगी कि दोनों पक्षों को बांध पर समझौते के अनुसार पानी मिल रहा है या नहीं।

नागार्जुन सागर बांध का विवाद गुरुवार को तब सामने आया जब तेलंगाना की मुख्य सचिव शांति कुमारी ने आंध्र प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, आंध्र प्रदेश के लगभग 500 सशस्त्र पुलिसकर्मी नागार्जुन सागर बांध पर आए। पुलिसकर्मियों ने सीसीटीवी कैमरों के साथ भी तोड़फोड़ की। शांति कुमारी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने गेट नंबर 5 और 7 के पास बने हेड रेगुलेटर को खोलकर लगभग 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश पुलिस के इस कदम से तेलंगाना में "कानून-व्यवस्था की समस्या" पैदा हो गई। जब पुलिसकर्मी बांध पर पहुंचे उस समय तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए मतदान चल रहा था। मुख्य सचिव शांति कुमारी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नागार्जुन सागर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों के दो करोड़ लोगों की पेयजल आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो जाएगी। .

बता दें कि करीब सात साल पहले भी नागार्जुन सागर डैम परिसर में घुसने की कोशिश का मामला सामने आया था। साल 2015 में आंध्र प्रदेश पुलिस ने बांध में घुसने का इसी तरह का प्रयास किया था। हालांकि, तेलंगाना पुलिस और बांधी की सुरक्षा में मुस्तैद सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर आंध्र प्रदेश पुलिस के प्रयास को नाकाम कर दिया था।
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