दो विधवाओं का आवास जबरन खाली कराने का आरोप
आरोप है कि रवि को 102, न्यू मोतीबाग के टाइप-7 का बंगला आवंटित कराने के लिए नागालैंड सरकार पर दबाव डाला गया कि वह अपने कोटे से उन्हें ये बंगला दिलवाए और इसके लिए अपने दो कर्मचारियों के आवास खाली करवाए। इसके लिए दो नागा महिला कर्मचारियों लीसा पिला अनर और टी असेनला पर दबाव डाला गया। लीसा ने तो पिछले साल जनवरी में ही आवास खाली कर दिया और टी असेनला से भी जबरन आरके पुरम का उनका सरकारी आवास खाली करवा दिया गया।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक अब नागालैंड सरकार पर राजभवन अधिकारियों की ओर से ये दबाव डाला जा रहा है कि वे राज्यपाल रवि के लिए आवंटित इस बंगले के पुराने बकाये बिलों का भुगतान भी वही करे, जो करीब 38 लाख रुपये है। उधर नागा सोसाइटी का दावा है कि रवि का पहले से ही दिल्ली में एक बड़ा फ्लैट है, पटना में भी संपत्ति है, केरल में फार्म हाउस है, ऐसे में किसी विधवा कर्मचारी से आवास खाली करवाना उचित नहीं है जबकि नागालैंड हाउस में उनके लिए भव्य सुइट मौजूद है।
क्या कहते हैं राजभवन के अधिकारी
इस बारे में जब अमर उजाला ने राज्यपाल के कमिश्नर टी महाबेमो यंथान से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले में जानकारी नहीं है, ये नागालैंड सरकार का मामला है। इसके पहले मीडिया से बात करते हुए यंथान ने कहा था कि अगर दिल्ली में दोनों आवास को खाली कराने को लेकर कोई असंतोष है तो इसे दूर करने का काम राज्य सरकार का है, राजभवन का नहीं।
रवि से क्यों नाराज रहता है एनएसीएन-आईएम
दरअसल नागा शांति वार्ता के दौरान रवि के सख्त रुख से कई नागा संगठन उनसे नाराज़ चल रहे हैं और उन्हें राज्यपाल पद से हटाने की कोशिश में लगे हैं। कई दौर की वार्ता के बाद भी अभी किसी नतीजे पर पहुंच पाना संभव नहीं हो सका है। पिछले साल सितंबर में हुई वार्ता के दौरान एनएसीएन – आईएम और कुछ अन्य संगठन अपना अलग झंडा और संविधान पर अड़े रहे जबकि रवि ने साफ कहा कि ये संभव नहीं है। रवि कुछ संगठनों की मांग को पूरे नागा समुदाय की मांग मानने के लिए सहमत नहीं हैं। उनके सख्त रुख से मुइवा गुट उनके सख्त खिलाफ है। पिछले साल वार्ता के बाद रवि ने ये बयान दे दिया था कि वार्ता खत्म हो चुकी है जबकि मुइवा ने इसका सख्त विरोध किया था कि वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है, खत्म नहीं हुई है और राज्यपाल को गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए।
ऐसे में दिल्ली में सरकारी आवास को लेकर उठे विवाद के बाद नागा सोसाइटी ने रवि के खिलाफ आरोपों की लंबी फेहरिस्त तैयार की है। जाहिर है राज्यपाल के आदेश को दिल्ली स्थित नागालैंड हाउस के कर्मचारी नजरअंदाज़ नहीं कर सकते, लेकिन दो विधवा कर्मचारियों के आवास जबरन खाली कराए जाने को लेकर भीतर ही भीतर नागा कर्मचारियों में असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं।