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MUDA: 'यदि याचिकाकर्ता सत्ता में नहीं होता तो इतना बड़ा लाभ नहीं मिल पाता', कर्नाटक HC ने जांच को बताया अहम

Tue, 24 Sep 2024 09:55 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

कर्नाटक के राज्यपाल ने 16 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 218 के तहत शिकायतकर्ताओं प्रदीप कुमार एसपी, टीजे अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा की तरफ से उनके समक्ष प्रस्तुत याचिकाओं में उल्लिखित कथित अपराधों के लिए अपनी मंजूरी दी थी।
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मुडा केस पर कर्नाटक HC की अहम टिप्पणी - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत की तरफ से मुडा साइट आवंटन 'घोटाले' में उनकी जांच करने की अनुमति को चुनौती देने वाली सिद्धारमैया की याचिका को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण की तरफ से एक प्रमुख इलाके में उनकी पत्नी को 14 साइटों के आवंटन में कथित अनियमितताओं में राज्यपाल की तरफ से दी गई मंजूरी को चुनौती दी थी।
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'ऐसा लाभ आम आदमी को कभी नहीं मिल सकता है'
मामले में अदालत ने कहा, न्यायालय के सुविचारित दृष्टिकोण में, कम से कम जांच की आवश्यकता होगी, क्योंकि यदि याचिकाकर्ता सत्ता की कुर्सी पर नहीं होता, मामलों के शीर्ष पर नहीं होता, तो इस तरह का लाभ नहीं मिल पाता। यह कभी किसी आम आदमी को नहीं मिला है, न ही भविष्य में मिल सकता है।

कृत्यों का लाभार्थी याचिकाकर्ता की पत्नी है- कोर्ट
कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया कि आम आदमी के लिए समय-समय पर नियमों को तोड़-मरोड़ कर इतनी जल्दी ये लाभ प्राप्त करना असामान्य बात है। न्यायाधीश ने कहा, इसलिए, याचिकाकर्ता ने भले ही अधिनियम के तहत अपने खिलाफ अपराध में शामिल होने के लिए अपना हस्ताक्षर न किया हो, कोई सिफारिश न की हो या कोई निर्णय न लिया हो, लेकिन लाभार्थी कोई अजनबी नहीं है। इन कृत्यों का लाभार्थी याचिकाकर्ता की पत्नी है।
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'याचिकाकर्ता ने खुद खुले मंच से की थी घोषणा'
अदालत ने कहा, यह याचिकाकर्ता की तरफ से स्वयं सार्वजनिक रूप से की गई खुली घोषणा है कि यदि मुडा उसे 62 करोड़ रुपये देता है, तो वह संपत्ति वापस कर देगा। अदालत ने कहा, इसलिए, केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने इन सभी कृत्यों में, चाहे वे कानूनी हों या अवैध, लिप्त रही है, याचिकाकर्ता को इन कारकों के कारण अपनी पत्नी के जीवन में क्या हो रहा है, के बारे में पूरी तरह से अनभिज्ञ नहीं कहा जा सकता। 

आम आदमी जांच से नहीं कतराता- कोर्ट
आदेश में कहा गया कि यह प्रथम दृष्टया अनुचित प्रभाव के हथियारों का विस्तार और मुख्यमंत्री की सीट या याचिकाकर्ता की तरफ से धारित किसी अन्य पद की शक्ति के दुरुपयोग को दर्शाता है। न्यायाधीश ने कहा कि यदि यह किसी आम आदमी का मामला होता, तो वह जांच का सामना करने से नहीं कतराता। अदालत ने कहा, इसमें संदेह छिपा हुआ है, बड़े-बड़े आरोप लगे हैं और 56 करोड़ रुपये का लाभार्थी मुख्यमंत्री का परिवार है - याचिकाकर्ता। इन स्पेक्ट्रमों से आंकलन करने और उपरोक्त आधारों से विश्लेषण करने पर, यह निष्कर्ष निकलता है कि जांच आवश्यक हो जाती है।

मुख्यमंत्री के खिलाफ राज्यपाल को याचिका देने वाले कार्यकर्ता अब्राहम के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में, अदालत ने कहा कि मुखबिरों को कभी-कभी ऐसे आरोपों का सामना करना पड़ता है। न्यायाधीश ने कहा- तीसरे प्रतिवादी (अब्राहम) के आपराधिक इतिहास के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है, जबकि जो कुछ भी कहा गया है वह रिकॉर्ड के विपरीत है।
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