उस वक्त जब आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच चल रही तनातनी अपने चरम पर थी, तब सीबीआई के बड़े अधिकारी ने दूसरे राज्य की पुलिस से जांच एजेंसी में कार्यरत अफसरों के फोन टेप कराने का प्रयास हुआ था। सूत्रों का दावा है कि यह प्रयास सीबीआई में दोनों खेमों की ओर से किया गया है। इसमें एक आला अधिकारी जो सीबीआई में आने से पहले जिस राज्य में थे, ने वहां की एक सैल से इस मामले में मदद मांगी थी।
बताया जाता है कि जांच एजेंसी के दूसरे बड़े अधिकारी ने दूर के राज्य की स्पेशल इकाई को कुछ मोबाइल नंबर भी दिए थे। सीबीआई के एक आला अफसर को जब अपने यहां की स्पेशल यूनिट से मदद नहीं मिली तो उन्होंने दूसरे राज्य में संपर्क किया था।बताया जाता है कि उक्त सीबीआई अधिकारी के संबंधित राज्य के पुलिस मुखिया के साथ घनिष्ठ संबंध रहे हैं। उनकी नियुक्ति में भी सीबीआई के उक्त अधिकारी का हाथ रहा है। इसी मामले में एक राज्य के मुख्यमंत्री से भी कुछ ऐसी ही मदद मांगी गई थी।
सीबीआई के अलावा केंद्र की अन्य जांच इकाइयां और राज्य पुलिस भी जरूरत पड़ने पर आरोपी या शिकायतकर्ता का फोन टेप कर सकती है। यदि बड़े अधिकारी का फोन टेप करना होता है तो उसके लिए गृह मंत्रालय की इजाजत पड़ती है। आपात स्थितियों में बिना किसी मंजूरी के भी टेपिंग हो सकती है। इसके लिए सर्विस प्रोवाइडर को लिखित में दे दिया जाता है कि संबंधित अधिकारी से 15 दिनों के अंदर इजाजत ले ली जाएगी।
एस्सार ग्रुप पर सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल ने 2016 में एक जनहित याचिका में आरोप लगाया था है कि ग्रुप ने 2001 से 2006 तक एनडीए और यूपीए सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों का फोन टेप कराया था। उन्होंने मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी जैसे कारोबारी दिग्गजों का फोन भी टेप होने की बात कही थी। इतना ही नहीं, सुरेन उप्पल ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान पीएमओ में कार्यरत एक अधिकारी का भी फोन टेप किया गया था।
बता दें कि सुरेन उप्पल एस्सार ग्रुप के उस कर्मचारी के वकील रहे हैं, जिस पर कथित तौर पर फोन टैपिंग का आरोप लगा था। इतना ही नहीं, वकील की शिकायत के मुताबिक, तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु, पूर्व मंत्री प्रफुल्ल पटेल, राम नाईक, अनिल अंबानी की पत्नी टीना अंबानी और कई टॉप ब्यूरोक्रेट्स के फोन टेप किए गए थे। इसके साथ ही सपा नेता अमर सिंह, तत्कालीन सीनियर नौकरशाह और यहां तक कि गृह सचिव राजीव महर्षि का भी नाम सामने आया था।
बतौर सुरेन, एनडीए सरकार में मंत्री रहे प्रमोद महाजन का फोन भी टेप किया गया था। टेलीकॉम लाइसेंसिंग के सिलसिले में भी कई लोगों के फोन सर्विलांस पर थे। हालांकि एस्सार ग्रुप ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया था। पिछले साल भी सीबीआई पर कथित रूप से एक केंद्रीय मंत्री का फोन टेप करने का आरोप लगा था। बाद में जाँच एजेंसी ने इस आरोप को पूरी तरह से झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया था।
कांग्रेस ने सीबीआई में चल रहे झगड़े के बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो के डीआईजी एमके सिन्हा के दावों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, मोदी सरकार की नाक के नीचे मंत्री घूस ले रहे हैं और पीएमओ से मंत्री चोरों को बचाने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी बताएं कि करोड़ों की घूस लेकर केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी ने पीएमओ के किस मंत्री के जरिए सीबीआई पर आरोपियों को बचाने का दबाव बनाया था।एनएसए अजीत डोभाल पर उठे सवालों को लेकर उन्होंने कहा, सीबीआई अधिकारी के हलफनामें में साफ लिखा है कि एक आरोपी जब पकड़ा गया तो उसने ‘अजीत डोभाल’ के नाम की धौंस दिखाई।