| तारीख |
राज्य/क्षेत्र |
| 26 मई |
बंगाल की खाड़ी |
| 27 मई- एक जून |
केरल, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, तमिलनाडु |
| पांच जून |
कर्नाटक, असम, मेघालय |
| 06-10 जून |
महाराष्ट्र, तेलंगाना, सिक्किम |
| 11-15 जून |
छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड |
| 16-20 जून |
पूर्वी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड |
| 21-25 जून |
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर |
| 26-30 जून |
पंजाब, हरियाणा |
सदी की सबसे बुरी गर्मी झेल रहा उत्तर भारत
इस बार सदी की सबसे बुरी गर्मी उत्तर भारत झेल रहा है। राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बांदा में तो तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। उधर, सोमवार को राजस्थान के धौलपुर में अधिकतम तापमान 46.1 डिग्री और यूपी के बांदा में रविवार को अधिकतम तापमान 49 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके अलावा 12 से ज्यादा शहरों में 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज किया गया। सबसे अधिक धौलपुर (46.1 डिग्री), इसके बाद झांसी (45.6 डिग्री), नौगांव (45.5 डिग्री), बठिंडा (45.1 डिग्री), वाराणसी, पटियाला और सीधी (प्रत्येक में 45 डिग्री) का स्थान रहा।
मंगलवार को झारखंड के डाल्टनगंज में 46, मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 45, यूपी के हमीरपुर में 44, प्रयागराज में 44, सुल्तानपुर में 40, कानपुर में 43, मैनपुरी में 43, लखनऊ में 42, अयोध्या में 43 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। कम से कम 25 से ज्यादा जिले ऐसे, रहे जहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया।
दिल्ली में 49 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच चुका है।
- फोटो : अमर उजाला
राजधानी दिल्ली हिट वेब की मार झेल रहा है। तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। ठंड में यहां जोरदार ठंड होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सबसे ज्यादा असर क्यों दिखता है? इसका जवाब जानने के लिए हमने मौसम वैज्ञानिक डॉ. केपी पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'दिल्ली अरावली और हिमालय के बीच समुद्र तल से 225 मीटर ऊपर स्थित है। राजधानी समुद्र से दूर है इसलिए यहां एक्स्ट्रीम क्लाइमेट का अनुभव होता है। यह देश के कुछ चुनिंदा शहरों में से एक है, जहां गर्मी और ठंडी दोनों ज्यादा पड़ती है। दिल्ली में इस समय कोई महत्वपूर्ण पश्चिमी विक्षोभ दर्ज नहीं किया गया है।'
डॉ. पांडेय आगे कहते हैं, 'मार्च, अप्रैल और मई के महीने में पश्चिमी विक्षोभ देखा गया है लेकिन यह इतना मजबूत नहीं था कि पर्याप्त बारिश ला सके। ज्यादातर बादल छाए या तेज हवाएं चलीं, जो अधिकतम तापमान को एक या दो डिग्री घटा सकती हैं लेकिन राहत नहीं दे सकती हैं।'
उन्होंने इस बार के आंकड़े भी पेश किए। बोले, 'इस बार दिल्ली में दो बारिश वाले दिन रहे- 21 अप्रैल को 0.3 एमएम बारिश दर्ज की गई और 4 मई को 1.44 एमएम बारिश हुई। मार्च के महीने में तो दिल्ली में बिल्कुल बारिश नहीं हुई। इसके पहले मार्च 2018 में भी ऐसा ही हुआ था।'