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डर की बात नहीं!: मंकीपॉक्स का पहला मरीज हेल्थ इमरजेंसी वाला नहीं, पर हरियाणा के हिसार में इसलिए बढ़ी निगरानी

Tue, 10 Sep 2024 12:59 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जिस युवक में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है उसको निगरानी में रखा गया है। मंकीपॉक्स के लिए बनाई गई नोडल एजेंसी के डॉक्टर आरएन कुमार कहते हैं जो मरीज पॉजिटिव पाया गया है वह गंभीर स्ट्रेन का नहीं है।
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मंकीपॉक्स। - फोटो : istock
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विस्तार
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देश में मिले पहले मंकीपॉक्स के मरीज के संपर्क में आए तीन दर्जन से ज्यादा लोगों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सबसे ज्यादा निगरानी हरियाणा के हिसार में होने लगी है। जानकारी के मुताबिक देश में मंकीपॉक्स का पहला मरीज हरियाणा के हिसार का रहने वाला है। यही वजह है कि इस युवा मरीज के संपर्क में आए उसके परिजनों के अलावा मिलने वालों और जान पहचान के लोगों में किसी भी तरह के लक्षणों के मिलने की निगरानी हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल दिल्ली के सरकारी अस्पताल में दाखिल इस मरीज का इलाज शुरू हो चुका है। जबकि देश के अलग-अलग राज्यों में पहले मरीज के मिलने के बाद और सतर्कता बरतने के साथ-साथ अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जिस युवक में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है उसको निगरानी में रखा गया है। मंकीपॉक्स के लिए बनाई गई नोडल एजेंसी के डॉक्टर आरएन कुमार कहते हैं जो मरीज पॉजिटिव पाया गया है वह गंभीर स्ट्रेन का नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जिस स्ट्रेन को हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है उस स्ट्रेन का दिल्ली के अस्पताल में दाखिल मरीज नहीं पाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अफ्रीका के देशों में मिल रहे मंकीपॉक्स के क्लेड 1 स्ट्रेन को विश्व की हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। हिसार के इस मरीज की आई रिपोर्ट के मुताबिक इसमें क्लेड 2 स्ट्रेन की पुष्टि हुई है। फिलहाल मरीज को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है और उसकी स्थिति को स्थिर बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक मंकीपॉक्स का मरीज हरियाणा के हिसार से है। चूंकि यह बीमारी मिलने जुलने के साथ भी फैलती है। इसलिए इस मरीज के संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू कर दी गई है। इसमें उसके परिजनों के अलावा दोस्तों और मिलने वालों को भी ऑब्जर्व किया जा रहा है। फिलहाल तीन दर्जन से ज्यादा लोगों पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नोडल एजेंसी ने निगरानी बरतनी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक हरियाणा के हिसार में भी इस बात के निर्देश दिए गए हैं कि मरीज से मिलने जुलने वालों के लक्षणों पर बारीकी नजर रखी जाए। हालांकि मरीज का इलाज करने वाली टीम ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को भेजी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि मरीज की हालत स्थिर है। फिलहाल मरीज को किसी तरीके के कोई गंभीर लक्षण नहीं दिख रहे हैं। इन लक्षणों के बाद भी मरीज का तय प्रोटोकॉल के मुताबिक इलाज किया जा रहा है।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य और राममनोहर लोहिया अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर सीपी अग्रवाल कहते हैं कि लोगों को इस बीमारी को लेकर पैनिक नहीं होना चाहिए। क्योंकि जो मरीज अस्पताल में दाखिल हुआ है उसमें अफ्रीका के देशों में फैले स्ट्रेन की पुष्टि नहीं हुई है। मंकी पॉक्स का जो स्ट्रेन अभी सामने आया है वह तो 2022 में भी आ चुका है। उनका कहना है कि क्लेड 2 स्ट्रेन उस तरह से खतरनाक नहीं है जिस तरह से अफ्रीका में फैला स्ट्रेन 1 खतरनाक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका के देशों में जो मामले अभी सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं उसमें 18 साल से 45 साल के लोग ज्यादा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस बीमारी में मृत्यु दर तीन फ़ीसदी तक है। जबकि भारत में मिले क्लेड 2 में मृत्यु दर .01 फीसदी ही है। इस बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन वह कहते हैं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से तय की गई गाइडलाइंस के मुताबिक लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। अगर शरीर पर चकत्ते आने और बुखार समेत चिकन पॉक्स जैसे लक्षण दिखे तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।

वहीं, देश में मिले पहले पॉजिटिव मरीज के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की है। मंगलवार को हुई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने इस पूरे मामले में सभी राज्यों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक सभी राज्यों में किसी भी तरह के संदिग्ध मरीज के सामने आते ही उसकी पूरी जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देनी होगी। इसके अलावा सभी राज्यों को अस्पतालों में स्क्रीनिंग के साथ-साथ ट्रैकिंग और ट्रेसिंग के लिए भी कहा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश के मुताबिक राज्यों के प्रमुख अस्पतालों के भीतर आइसोलेशन की सुविधा को जांचने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गठित की गई टीम के डॉक्टर कुमार कहते हैं कि मंगलवार को संबंधित राज्यों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई है। उसके बाद दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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