उत्तर प्रदेश में पकड़े गए धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के तार मनी लॉन्ड्रिंग से भी जुड़ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में एक आपराधिक मामला दर्ज किया है और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा पैसा मुहैया कराने का आरोप
ईडी के आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की गई है। यह मुकदमा यूपी पुलिस की एटीएस की कार्रवाई के आधार पर दर्ज किया गया है।
दरअसल एटीएस ने इस हफ्ते की शुरुआत में दिल्ली के जामिया नगर से मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी और मोहम्मद उमर गौतम को गिरफ्तार किया था। एटीएस ने दावा किया था कि ये दोनों इस्लामिक दावा केंद्र नामक संस्था के जरिए लोगों का धर्मांतरण करा रहे थे।
ये एक हजार से अधिक मूक बधिर छात्रों और गरीब लोगों को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण करा चुके हैं। एटीएस ने दावा किया था कि इसके लिए इन दोनों के पास आईएसआई और अन्य विदेशी एजेंसियों के जरिए पैसा आ रहा था। ईडी सूत्रों ने बताया कि जांच का मुख्य फोकस विदेशों और घरेलू मददगारों के मिलने वाले अवैध धन पर ही होगा।