सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमों की सुनवाई में न्याय मित्रों व वकीलों की सहूलियत और दस्तावेजों के बेहतर रखरखाव के लिए राज्य विधि सेवा प्राधिकरणों से कहा है कि वे मांगे जाने पर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज डिजिटल प्रारूप में भेजें। जस्टिस उदय उमेश ललित और जस्टिस एस रविंद्र भट ने यह निर्देश ऐसे मामले में दिए, जहां एक न्याय मित्र को राजस्थान के प्राधिकरण ने आपराधिक मामले में दस्तावेज और गवाहों के बयान मुहैया नहीं करवाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अक्सर इसी प्रकार से अधूरे दस्तावेज सौंपे जा रहे हैं। कानूनी मदद के मामलों में बेहतर सेवा देने के लिए यह आवश्यक होते हैं। अगर प्राधिकरण इन्हें डिजिटल प्रारूप में भेजेगा तो वकीलों और न्याय मित्रों को मदद मिलेगी।