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Bengal Molestation Row: राज्यपाल बोस ने 100 लोगों को दिखाया राजभवन का CCTV फुटेज; जानें पूरा मामला

Thu, 09 May 2024 02:07 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल का राजभवन महिला उत्पीड़न के कथित मामले के कारण सुर्खियों में है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने पहले ही कह दिया था कि वह राजभवन की सीसीटीवी फुटेज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कोलकाता पुलिस को नहीं दिखाएंगे।
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बंगाल राज्यपाल सीवी आनंद बोस - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस पर एक महिला द्वारा छेड़छाड़ का आरोप लगाए जाने पर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस बीच, बोस ने गुरुवार को महिला के कथित उत्पीड़न के मामले में करीब 100 लोगों को दो मई के परिसर के सीसीटीवी फुटेज दिखाए।

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राजभवन के भूतल पर मौजूद हॉल में लोगों को दो मई की दो सीसीटीवी कैमरों का फुटेज दिखाया गया है। बताया जा रहा कि राजभवन के मुख्य गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज दिखाए जा रहे थे और स्क्रीनिंग चल रही थी।


गौरतलब है कि राजभवन में संविदा पर नियुक्त महिला कर्मचारी ने राजभवन में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कोलकाता पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। महिला की शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एसईटी का गठन किया है। बोस ने बुधवार को कहा था कि वे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग कोलकाता पुलिस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नहीं दिखाएंगे।
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पुलिस पर 'सरकारी शिकंजे' का आरोप
खबर के मुताबिक पुलिस ने राजभवन के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन पहले दिन कोई पेश नहीं हुआ। राज्यपाल ने भी कथित तौर पर कर्मचारियों को निर्देश दिया था कि इस मामले में पुलिस का सहयोग नहीं करना है। बुधवार को राजभवन से जारी बयान में आरोप लगाया गया था कि पुलिस मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देशों के तहत काम कर रही है। ऐसे में वह संबंधित सीसीटीवी फुटेज इन दोनों को छोड़कर 100 लोगों को दिखाने के लिए तैयार है।

सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाने के आरोप पर बयान
राजभवन की तरफ से सोशल मीडिया हैंडल- एक्स पर जारी बयान में कहा गया था कि पुलिस के आरोप मनगढ़ंत हैं। इसका पर्दाफाश करने के लिए राज्यपाल ने 'सच के सामने' कार्यक्रम शुरू किया है। पुलिस की जांच को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए राजभवन ने कहा था कि एक घटना की सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाए जाने के आरोप सही नहीं हैं।

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