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नगालैंड में शांति समझौता: केंद्र का बड़ा कदम, गृह मंत्रालय ने यूएनसीएन के निकी गुट के साथ संघर्ष विराम के करार पर मुहर लगाई

Wed, 08 Sep 2021 11:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गृह मंत्रालय के मुताबिक, संघर्ष विराम समझौता नगा शांति प्रक्रिया और पूर्वोत्तर को उग्रवाद मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उग्रवाद मुक्त और समृद्ध उत्तर पूर्व के पीएम मोदी के सपने को पूरा करने में निकी ग्रुप के साथ समझौता किया गया है।
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गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र ने बुधवार को निकी सूमी के नेतृत्व वाले नगा विद्रोही समूह एनएससीएन के एक गुट के साथ संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह वही गुट है, जिसके खिलाफ 2015 में एनआईए ने मणिपुर में 18 भारतीय सेना के जवानों की कथित हत्या के लिए 10 लाख रुपये के इनाम रखा था। गृह मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, शांति समझौता आठ सितंबर से एक साल के लिए लागू होगा। इस दौरान समूह के 200 से अधिक कार्यकर्ताओं ने 83 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है।
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गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि संघर्ष विराम समझौता नगा शांति प्रक्रिया और पूर्वोत्तर को उग्रवाद मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  बयान के मुताबिक, उग्रवाद मुक्त उत्तर पूर्व के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने और नगा शांति प्रक्रिया को महत्वपूर्ण बढ़ावा देने के लिए नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (के) निकी गुट के साथ संघर्ष विराम समझौता किया है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका भी अहम रही है। 

उग्रवाद मुक्त पूर्वोत्तर के मद्देनजर बुधवार को संघर्ष विराम समझौते और सहमत संघर्ष विराम के नियमों पर हस्ताक्षर किए गए। पिछले साल दिसंबर में खूंखार आतंकवादी निकी सूमी के नेतृत्व में एनएससीएन-के ने संघर्ष विराम की घोषणा की थी और कहा था कि संगठन ने शांति वार्ता शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क किया है। गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि भारत सरकार ने पहले ही एनएससीएन-आईएम और अन्य नगा समूहों जैसे एनएससीएन-एनके, एनएससीएन-आर और एनएससीएन-के-खांगो के साथ संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
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बीते दिनों हुए कई समझौते
  • इससे पहले केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में एनएलएफटी (एसडी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 88 कैडरों ने 44 हथियारों के साथ त्रिपुरा में आत्मसमर्पण किया था। 
  • जनवरी 2020 में बोडो समझौते पर हस्ताक्षर के साथ एनडीएफबी के सभी गुटों सहित विद्रोही समूहों के 2,250 से अधिक कैडरों ने 423 हथियारों और भारी मात्रा में गोला-बारूद के साथ असम में आत्मसमर्पण किया था।
  • 23 फरवरी 2021 को असम के विभिन्न भूमिगत कार्बी समूहों के 1,040 नेताओं और कैडरों ने 338 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था।
  • इसके बाद 4 सितंबर 2021 को भी कार्बी आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
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