आज मद्रास पूरे 379 साल का हो गया है। आज ही के दिन 22 अगस्त साल 1639 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई की आधारशिला ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा रखी गई थी। उस वक्त इसे मद्रास के नाम से जाना जाता था। करीब 70 लाख की आबादी वाला यह शहर दुनिया का 31वां सबसे बड़ा शहर माना जाता है। लेकिन इतिहास की नजर में ये शहर 379 नहीं बल्कि 2 हजार साल पुराना है। दूसरी शाताब्दी में यह चोल साम्राज्य का हिस्सा था। वहीं तोडईमंडलम प्रांत में मद्रास पट्टनम नाम का छोटा सा गांव हुआ करता था।
सेंट फोर्ट जार्ज के निर्माण के साथ अस्तित्व में आया
आधुनिक मद्रास सेंट फोर्ट जार्ज के निर्माण के साथ ही 22 अगस्त 1639 को अस्तित्व में आया था। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने आसपास के छोटे-छोटे गांवों को भी मद्रास में ही मिला लिया था।
जमीन के टुकड़े पर जन्मा था मद्रास
1639 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से कोरोमंडल तट चंद्रगिरी में कुछ जमीन खरीदी थी। इसी जमीन पर आधुनिक मद्रास ने जन्म लिया। यहीं पर सेंट फोर्ट जार्ज का निर्माण किया गया था। जोे कि औपनिवेशिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु था।
पूरा चेन्नई मनाता है मद्रास दिवस
हर साल 22 अगस्त को तमिलनाडु राज्य की राजधानी चेन्नई में मद्रास दिवस समारोह मनाया जाता है। इस दिवस को ये नाम शहर के पुराने नाम मद्रास पर दिया गया है। इस दिन पूरे शहर में जगह-जगह आयोजन किए जाते हैं। इनमें शहर के सभी नागरिक हिस्सा लेते हैं। बता दें साल 1939 में मद्रास के इतिहास के बारे में पता लगाने के लिए एक कमिटी भी बनाई गई थी। जिसमें इतिहासकार और प्रोफेसर शामिल थे। इस दिवस को मनाने का विचार साल 2004 में चेन्नई हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा रखा गया था। ताकि ऐतिहासिक धरोहरों का रखरखाव किया जा सके और नागरिक भी इनकी मरम्मत करने जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले सकें।