पहले जानें- विधान परिषद चुनाव में अब तक क्या रहे हैं नतीजे?
विधान परिषद की 28 सीटों में अब तक आए नतीजों/रुझानों को देखा जाए तो सामने आता है कि भाजपा और उसकी समर्थित पार्टियों वाले एनडीए ने कुल 15 सीटें जीती हैं। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन को 10 सीटें मिली हैं, जबकि एक सीट अन्य और दो निर्दलीयों के पास आती दिख रही हैं।
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चुनाव के बाद कितनी बदल गई किस पार्टी की स्थिति?
उत्तर प्रदेश में क्या बदला?
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों (5 स्नातक और 6 शिक्षक) के चुनाव में सीटों का गणित और राजनीतिक परिदृश्य दोनों बदले हैं।
1. भाजपा ने एक सीट गंवाई-एक जीती (कोई बदलाव नहीं)
- इस चुनाव में दांव पर लगी 11 सीटों में से छह पहले से भाजपा के पास थीं। इसमें मेरठ स्नातक, मेरठ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, लखनऊ शिक्षक, लखनऊ स्नातक और आगरा स्नातक सीट थीं।
- इन छह सीटों में से भाजपा के हाथ से लखनऊ स्नातक सीट निकल गई, जिस पर सपा की कांति सिंह ने 17,127 मतों के बड़े अंतर से भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह को हराया।
- हालांकि, पार्टी को निर्दलीय के कब्जे वाली गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर जीत मिली। यहां उसके प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय को हराकर भाजपा की सीटों की संख्या छह बरकरार रखने में मदद की।
2. समाजवादी पार्टी की दो सीट का फायदा
- लखनऊ स्नातक सीट सपा ने भाजपा से छीन ली। इसके अलावा पार्टी ने आगरा शिक्षक सीट निर्दलीय से छीन ली।
- दो सीटों के फायदे के साथ सपा ने अपनी तीन पुरानी सीटें- वाराणसी स्नातक, वाराणसी शिक्षक और झांसी-इलाहाबाद स्नातक बरकरार रखीं।
3. निर्दलीयों का वर्चस्व खत्म
यूपी में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों का वर्चस्व समाप्त हो गया और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट के अलावा आगरा शिक्षक सीट पर भी निर्दलीय की हार हुई दोनों सीटें मुख्य दलों के खाते में चली गईं।
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बिहार में क्या बदला?
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों (4 शिक्षक और 4 स्नातक) के चुनाव परिणामों से राज्य की राजनीति में कई प्रमुख बदलाव देखने को मिले।
1. जन सुराज पार्टी
- प्रशांत किशोर की नई पार्टी ने बिहार विधान परिषद में पहली बार अपनी चुनावी जीत दर्ज कर खाता खोला।
- जनसुराज के सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और निवर्तमान एमएलसी मदन मोहन झा को 324 वोटों के अंतर से हराया।
2. राष्ट्रीय जनता दल
- लगभग ढाई दशक के लंबे अंतराल के बाद राजद ने विधान परिषद के इन चुनावों में जीत हासिल की।
- पटना शिक्षक सीट पर राजद के संजीव कुमार यादव ने बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा के लगातार पांच बार के निवर्तमान एमएलसी नवल किशोर यादव को हरा दिया।
3. जनता दल- यूनाइटेड
- जदयू ने अपनी अहम पटना स्नातक सीट को सफलतापूर्वक बरकरार रखा। उसके नेता नीरज कुमार ने राजद उम्मीदवार को पराजित कर जीत दर्ज की।
- चुनाव के दौरान मोकामा के बागी नेता अनंत सिंह ने पार्टी के खिलाफ जाकर जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन किया था, जिसके बाद जदयू ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।
4. भाजपा
- भाजपा को बिहार में मिश्रित सफलता मिली। उसने एक पारंपरिक सीट गंवाई, लेकिन एक नई सीट पर जीत हासिल की।
- तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने भाकपा के निवर्तमान एमएलसी संजय कुमार सिंह को हराकर जीत दर्ज की।
- कोसी स्नातक सीट पर भाजपा प्रत्याशी एनके. यादव विजयी रहे। यह सीट पहले भी भाजपा के पास ही थी।
- हालांकि, पटना शिक्षक सीट पर पार्टी के दिग्गज नेता नवल किशोर यादव की हार भाजपा के लिए बड़ा झटका रही।
5. भाकपा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कब्जे वाली तिरहुत शिक्षक सीट पर उसे हार मिली है। भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने निवर्तमान एमएलसी संजय कुमार सिंह को हराकर जीत दर्ज की।
6. कांग्रेस
कांग्रेस के कब्जे वाली दरभंगा शिक्षक सीट पर उसे हार मिली। जनसुराज पार्टी ने सीट पर उसके पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को हराया।
7. निर्दलीय
- सारण शिक्षक सीट पर भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े राहुल राज ने निवर्तमान एमएलसी आफाक अहमद को हराकर जीत हासिल की।
- तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर बृजवासी जीते। पिछले चुनाव में ये सीट जदयू के पास थी।
महाराष्ट्र में क्या बदला?
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों (तीन स्नातक और दो शिक्षक) के परिणामों में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने तीन सीटें और सत्तारूढ़ महायुति ने 2 सीटें जीती हैं।
1. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट)
- शरद पवार वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुट- राकांपा-एसपी ने चुनाव में उन दो सीटों पुणे स्नातक और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) सीटों पर कब्जा जमाया, जो कि पहले अविभाजित राकांपा के पास थीं। इस लिहाज से देखा जाए तो पार्टी को दो सीटों का लाभ हुआ है।
- पुणे स्नातक सीट पर हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा की स्मिता जाधव को हराया। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर प्रतापसिंह पाटिल ने अजित पवार गुट की राकांपा के निवर्तमान एमएलसी सतीश चव्हाण को पराजित किया।
2. कांग्रेस
- कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी।
- नागपुर आरएसएस का मुख्यालय और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र होने के कारण यह जीत कांग्रेस के लिए बड़ी जीत है।
- हालांकि, पुणे शिक्षक सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। यह सीट को भाजपा ने उससे छीन ली।
महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव नतीजे।
- फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक में क्या बदला?
कर्नाटक विधान परिषद की 4 सीटों (2 स्नातक और 2 शिक्षक) के चुनाव परिणामों में भाजपा-जेडीएस के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का एकतरफा वर्चस्व रहा, जबकि सत्ताधारी कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया।
1. कांग्रेस को एक सीट का नुकसान
चुनाव में गई कर्नाटक की कुल चार सीटों में से सिर्फ बंगलूरू शिक्षक सीट कांग्रेस के पास थी। इस पर उसके एमएलसी पुतन्ना थे। हालांकि, चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपनी यह सीट गंवा दी।
2. जनता दल (सेक्युलर) को एक सीट का फायदा
- जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस के पास मुकाबले में आईं चार सीटों में से एक भी नहीं थी।
- उसने कांग्रेस से बंगलूरू शिक्षक सीट छीनकर अपनी तालिका में एक एमएलसी जोड़ लिया।
- जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के निवर्तमान MLC पुत्तन्ना को 908 वोटों से हराया।