पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री सी लालसाविवुंगा ने कहा कि राज्य में स्वाइन बुखार के प्रकोप के कारण 57,000 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। जबकि 43,000 से अधिक मारे गए।
मिजोरम में अफ्रीकी स्वाइन बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में राज्य की राजधाली आइजोल समेत 234 गांवों में बुखार फैला हुआ है। मिजोरम सरकार ने शुक्रवार को केंद्र से राज्य में बुखार के प्रकोप से प्रभावित सुअर पालकों और किसानों के लिए मुआवजा मांगा है। राज्य के पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री सी लालसाविवुंगा ने कहा कि अफ्रीकी स्वाइन बुखार ने राज्य को बहुत प्रभावित किया है और सुअर पालकों को आर्थिक रूप से प्रभावित किया है।
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ओडिशा में पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्रियों की बैठक में लालसाविवुंगा ने केंद्र से सुअर पालकों के नुकसान की भरपाई के लिए कदम उठाने का आग्रह किया। मंत्री ने केंद्र से जल्द से जल्द टीकों का उत्पादन या अन्य देशों से आयात करने का प्रयास करने की भी अपील की।
मंत्री ने बताया कि राज्य में स्वाइन बुखार के प्रकोप के कारण 57,000 से अधिक सूअरों की मौत हो गई। जबकि 43,000 से अधिक मारे गए। इससे 2021 से अब तक लगभग 800 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। सुअर पालकों को मुआवजा देने के लिए केंद्र की ओर से 2021-22 और 2022-23 में करीब सात करोड़ रुपये दिये गये थे। राज्य ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए केंद्र से 74.7 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी मांगी थी। इसे राष्ट्रीय संचालन समिति ने मंजूरी दे दी है।
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स्वाइन बुखार पहली बार मार्च 2021 में बांग्लादेश सीमा के पास दक्षिण मिजोरम के लुंगलेई जिले के लुंगसेन गांव में रिपोर्ट किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि इसका प्रकोप पड़ोसी देश से अवैध रूप से आयातित सूअरों के कारण हुआ था।
डॉक्टरों के मुताबिक अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सूअरों की नस को तोड़ देता है। एक बार संक्रमित होने के बाद 95 से 100 प्रतिशत सूअर की मौत निश्चित है। इससे तेज बुखार होता है और खून की नशें फट जाती हैं। इसलिए इनको मारना और दफन करना जरूरी होता है। यह इंसानों में नहीं फैलता है।