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Mizoram Election Result: मिजोरम में 30 वर्षों में सिर्फ तीन मुख्यमंत्री, क्या इस बार मिलेगा नया चेहरा?

Mon, 04 Dec 2023 09:21 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आइजोल

सार

मिजोरम के केंद्र शासित प्रदेश रहने के दौरान 15 वर्षों में जहां तीन मुख्यमंत्री रहे, वहीं 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से ही राज्य ने इन्हीं दोनों पार्टियों का राज देखा है। वह भी सिर्फ तीन मुख्यमंत्रियों के शासन में।
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मिजोरम में जोरामथांगा के सामने दो चुनौतियां। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पूर्वोत्तर में अहम राज्य मिजोरम में सोमवार को मतगणना होगी। यहां सत्तासीन मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। 40 सदस्यीय विधानसभा सीटों पर चुनावी मैदान में कुल 173 उम्मीदवार उतरे हैं। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने भी मिजोरम में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए 21 प्रत्याशी उतारे हैं। 
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चौंकाने वाली बात यह है कि मिजोरम के केंद्र शासित प्रदेश रहने के दौरान 15 वर्षों में जहां तीन मुख्यमंत्री रहे, वहीं 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से ही राज्य ने इन्हीं दोनों पार्टियों का राज देखा है। वह भी सिर्फ तीन मुख्यमंत्रियों के शासन में। यानी मिजोरम में बीते 52 साल में महज पांच मुख्यमंत्री रहे हैं और इनमें से 30 साल यानी 1993 से 2023 तक सिर्फ दो मुख्यमंत्री- कांग्रेस के ललथनहवला और एमएनएफ के जोरामथांगा। 

कब से कब तक रहा किस मुख्यमंत्री का शासन?

1. एमएनएफ और कांग्रेस के बीच रस्साकशी की शुरुआत
1987 में मिजोरम का पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद यहां मिजो नेशनल फ्रंट और निर्दलियों की सरकार बनी और लालदेंगा मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 1989 में हुई चुनाव कांग्रेस ने जीत दर्ज की और ललथनहवला मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 1993 में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनी और ललथनहवला सीएम बने। 
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2. मिजोरम में जोरामथांगा का वर्चस्व
आखिरकार 1998 में राज्य में एक बार फिर मिजो नेशनल फ्रंट ने 21 सीटों के साथ फिर सरकार बनाई और जोरामथांगा सीएम बने। 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जोरामथांगा बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रहे और 21 सीट हासिल कर फिर मुख्यमंत्री बने। 

3. ललथनहवला ने नहीं मानी हार, फिर पलटी बाजी
2008 में कांग्रेस ने एक बार फिर बाजी पलटी और 32 सीटों पर जीत दर्ज की। एक बार फिर राज्य में ललथहवला सीएम बने। 2013 में भी ललथनहवला ने मोदी लहर के बीच कांग्रेस को 34 सीटों पर जीत दिलाई और सीएम पद पर दावेदारी पक्की की। हालांकि, 2019 में एमएनएफ के जोरामथांगा ने एंटी-इन्कंबेंसी फैक्टर का फायदा उठाते हुए 28 सीटों के साथ सरकार बनाई। 

अब जानें पिछले तीन चुनावों में क्या रहे मिजोरम में नतीजे

1. 2018 में नतीजे क्या रहे थे?
राज्य में पिछले चुनाव 28 नवंबर 2018 को हुए थे। इस चुनाव में 40 सदस्यीय विधानसभा में एमएनएफ को 27 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस ने चार सीटें, जबकि भाजपा को एक सीट पर विजय मिली थी। इसके अलावा आठ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली थी। इसके साथ ही राज्य में मुख्यमंत्री जोरमथंगा के नेतृत्व में एमएनएफ की सरकार बनी थी।

2. 2013 में कैसे जीती कांग्रेस
2013 में मिजोरम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 34 विधानसभा सीटें जीती थीं। वहीं, मिजो नेशनल फ्रंट महज पांच सीट ही जीत पाई। एक सीट मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस को मिली थी। इन चुनावों में कांग्रेस को 45%, एमएनएफ को 28% वोट मिले थे। जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM), जो कि सात क्षेत्रीय दलों से मिलकर बनी थी, उसके दो दल ही ऐसे थे, जिन्होंने 2013 में चुनाव लड़ा था। तब एमपीसी को छह प्रतिशत और जोराम नेशनलिस्ट पार्टी को 17 फीसदी वोट मिले थे। जोराम नेशनलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष लालदुहावमा तब ही पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे थे। खास बात है कि 2013 में भाजपा को राज्य में महज 0.37 प्रतिशत वोट मिले थे। 

3. 2008 में जोरामथांगा ने छीनी थी जोरामथांगा की 10 साल की सत्ता
कांग्रेस ने 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की थी। पार्टी को 40 में से 32 सीटें मिली थीं और मिजो नेशनल फ्रंट को महज तीन सीटे मिली थीं, जिसके बाद जोरामथांगा को 10 साल बाद सत्ता गंवानी पड़ी थी। इन चुनावों में तीन पार्टियों- मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (2), जोराम नेशनलिस्ट पार्टी (2) और  मारालैंड डेमोक्रेटिक फ्रंट (1) को कुल पांच सीटें मिली थीं।

2023 में क्या हैं समीकरण?
इस बार किस पार्टी ने कितने प्रत्याशी उतारे?
एमएनएफ- 40
जेडपीएम- 40
कांग्रेस- 40
भाजपा- 23
आम आदमी पार्टी- 04
निर्दलीय- 27

इन चेहरों पर रहेगी नजर
1. जोरमथांगा, एनएनएफ
मिजोरम के वर्तमान मुख्यमंत्री और एमएनएफ के मुखिया हैं। वे भूमिगत एमएनएप नेता लालडेंगा के सहयोगी और उत्तराधिकारी हैं। जोरमथांगा की पहचान एक मिजो राष्ट्रवादी के रूप में है। वे म्यांमार और बांग्लादेशी शरणार्थियों को पनाह देकर एक उदार चेहरा बन कर उभरे हैं।

2. लालदुहोमा, जेडपीएम
जोरम पिपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) के प्रमुख और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालदुहोमा एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने भूमिगत एमएनएफ नेता लालडेंगा के साथ लंदन में बातचीत करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर नौकरी छोड़ी दी थी। बाद में उनके मिजो पीसीसी के साथ मतभेद हो गए थे। 2017 में जेडपीएम का गठन किया गया।

3. लालसावता, कांग्रेस
कांग्रेस इस बार नए नेतृत्व में प्रदेश में चुनाव मैदान में उतरी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लालसावता की छवि एक साफ-सुथरे नेता के रूप में है। वे प्रदेश के सबसे सफल वित्तमंत्री के रूप में जाना जाता है। कांग्रेस का मानना है कि जनता के पैसे और विकास लालसावता के नेतृत्व में सुरक्षित रहेंगे। राज्य की आर्थिक विकास को लालसावता एक बेहतरीन स्थिति में ला सकते हैं।

इन सीटों पर रहेगी की सबकी नजर
आइजोल पूर्व-1: यह सबसे सबसे चर्चित सीट है। इस सीट से निवर्तमान मुख्यमंत्री जोरमथांगा फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। जोरमथांगा 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से जीते थे। इस बार उनके सामने जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) के उपाध्यक्ष लालथानसांगा हैं। यह सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट रही है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है।

आइजोल पश्चिम-III: इस सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। यहां पर भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। तीनों ही एक-दूसरे पर भारी दिखाई दे रहे हैं। निवर्तमान जेडपीएम विधायक वीएल जेथनजामा के खिलाफ पूर्व वित्त मंत्री और वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष लालसावता और एमएनएफ उम्मीदवार के. सॉमवेला मैदान में हैं।

हच्छेक: इस सीट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह त्रिपुरा की सीमा से सटे ममित जिले में है। यहां पर अभी कांग्रेस के लालरिंडिका राल्टे विधायक हैं। यहां से एमएनएफ ने राज्य खेल मंत्री रॉबर्ट रोमाविया रॉयटे को उतारा है। यह सीट भले ही कांग्रेस की रही है, लेकिन इस बार रॉयटे भी मजबूत नजर आ रहे हैं। जेडपीएम ने केजे लालबियाकनघेटा को यहां से उतारा है।

सेरछिप: इस विधानसभा सीट से जेडपीएम नेता और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालडुहोमा मैदान में हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने यहां से जीत दर्ज की थी। इस बार उनके सामने एमएनएफ ने जे. माल्सावमजुअल वानचावंग और कांग्रेस ने आर. वानलालट्लुआंगा को मैदान में उतारा है। लालडुहोमा ने 2018 में इस सीट से पांच बार के मुख्यमंत्री ललथनहवला को मात दी थी। इस बार यहां माल्सावमज़ुअल वानचावंग के आने से मुकाबला और रोमांचक हो गया है।
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