मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा व अन्य को एजोल की एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया। दिसंबर 2009 के इस मामले में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूर्व सीएम व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था।
विशेष न्यायाधीश ने मामले में सीएम समेत चार आरोपियों को अभियोजन पक्ष द्वारा अपराध साबित नहीं कर पाने के कारण दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि अभियोजन भ्रष्टाचार व षड्यंत्र की धाराओं से संबंधित साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
बता दें, राज्य के एसीबी ने दिसंबर 2009 में जोरमथंगा, पूर्व कृषि मंत्री एच. रम्मावी, सीएम के पूर्व सलाहकार लालहुपजुवा व अन्य के खिलाफ एक कंपनी को ब्याज मुक्त कर्ज देने के आरोप में भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था।
218 लाख का कर्ज दिया गया था
कुल 218.5 लाख रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज चार फर्मों- मिजोरम वीनस बैंबू प्रोडक्ट, हनलन ग्रेप ग्रोवर्स सोसायटी, चंपाई ग्रेप ग्रोवर्स सोसायटी, मिजो आर्गेनिक प्रोड्यूसर्स कंपनी लि. को वितरित किया गया था।
कोर्ट ने यह कहा-
मामले में सभी आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपियों ने बेईमानी, धोखाधड़ी, अवैध व भ्रष्ट तरीकों से एमआईपी स्कीम 2006 की गाइड लाइन का उल्लंघन करते हुए खुद के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए धन का इस्तेमाल किया।
अतिरिक्त सरकारी वकील सी. लालरिंचुंगा ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। उक्त फर्मों को एमआईपी गाइड लाइन का उल्लंघन कर कर्ज दिए गए। इतना ही नहीं इनके द्वारा कर्ज को चुकाया भी नहीं गया। आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर धन की हेराफेरी की।
वहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि इस पैसे का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने निजी लाभ के लिए किया। परीक्षण के दौरान भी आरोपियों ने कहा कि उन्होंने पात्र सोसायटी व कंपनियों को ही यह कर्ज दिया था, ताकि आदिवासी समुदाय का उत्थान किया जाए। केंद्र द्वारा दिए गए धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया गया, जिसके लिए दिया गया था।