इंफाल घाटी में खुलेआम घूम रहे उग्रवादी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनते जा रहा हैं। दो बच्चों की हत्या के बाद से ही मणिपुर में स्थिति उग्र बनी हुई है। बच्चों के शवों की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद से ही स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश हैं। इसी बीच मणिपुर के इंफाल घाटी में खुलेआम उग्रवादी घूम रहे हैं। साथ ही वे स्थानीय लोगों को उकसाने का काम भी कर रहे हैं।
उग्रवादी बने भीड़ का हिस्सा
अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार शाम पुलिस दल पर किए गए हमलों के दौरान काली वर्दी पहने हथियारबंद लोग उत्तेजित युवाओं को पुलिस पर हमला करने के लिए उकसाते हुए दिखाई दिए। जिसके बाद उत्तेजित युवाओं ने कई वाहनों को आग लगा दी थी। इसी बीच, सुरक्षा एजेंसियां चेतावनी देती रही हैं कि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और अन्य प्रतिबंधित समूहों के आतंकवादी भीड़ का हिस्सा बन गए हैं और सुरक्षा बलों पर गुप्त हमले करने के साथ-साथ आंदोलनकारियों को निर्देश भी दे रहे हैं।
हाल ही में एक उग्र भीड़ में इन उग्रवादियों को देखा गया था। जिसने टेंगनौपाल में पलेल के पास सुरक्षा बलों पर हमला किया था। इस घटना में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल घायल हो गए थे।
अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि हाल ही में पुलिस शस्त्रागार से लूटे गए घातक हथियार रखने वाले चार युवकों की रिहाई एक खतरनाक संकेत है। उन्हें पकड़ने और कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के प्रयास तेज किए जाने चाहिए।
पुलिस शस्त्रागार से लूटे हथियार
लूटे गए हथियारों में 303 राइफल, मीडियम मशीन गन (एमएमजी) और एके असॉल्ट राइफल, कार्बाइन, इंसास लाइट मशीन गन (एलएमजी), इंसास राइफल, एम-16 और एमपी5 राइफल शामिल हैं।
3 मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 180 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सौ घायल हुए हैं, जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था।
जुलाई में लापता हुए दो युवकों के शवों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मंगलवार को राज्य की राजधानी में छात्रों के नेतृत्व में हिंसा की एक ताजा घटना भड़क गई।