पश्चिम बंगाल सरकार ने अभी तक सात एकीकृत जांच चौकियों (आईसीपी) के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। गृहमंत्रालय की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। 2022-23 के लिए गृहमंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि आईसीपी की स्थापना के लिए केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के साथ भारत की सीमाओं पर कुल 14 स्थानों की पहचान की गई है। बता दें कि एकीकृत जांच चौकियां (आईसीपी) माल और यात्रियों की सीमा पार आवाजाही को सुचारू बनाती हैं।
आईसीपी से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा में और सुधार होने के साथ-साथ पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार और संबंधों में भी सुधार होने की उम्मीद है।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीपी के निर्माण के लिए जिन जगहों का चयन किया गया है उनमें नेपाल की सीमा पर रुपईडीहा और सोनौली (दोनों उत्तर प्रदेश में), बनबसा (उत्तराखंड), भिठामोर (बिहार) और पानीटंकी (पश्चिम बंगाल) और भूटान की सीमा पर पश्चिम बंगाल में जयगांव शामिल हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की सीमा पर पश्चिम बंगाल के फुलबारी, महादीपुर, घोजाडांगा, हिली और चांगराबांधा स्थान शामिल हैं। साथ ही इसी सीमा पर मेघालय में डौकी, मिजोरम में कावरपुइचुआ, त्रिपुरा में सबरूम का चयन भी किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में सात आईसीपी के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई थी। सात फरवरी, 2022 को इस परियोजना से संबंधित सारी जानकारी राज्य सरकार को सौंप दी गई थी। इतना ही नहीं, सभी आईसीपी के लिए स्थानों का भी चयन कर लिया गया था। बावजूद इसके राज्य सरकार ने अभी तक इन स्थानों के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू नहीं किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डौकी, सोनौली, कावरपुइचुआ और सबरूम में आईसीपी के निर्माण के लिए काम चालू है। वहीं, रुपईडीहा में 93 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा भी हो चुका है। इसके अलावा आईसीपी सोनौली के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 106.54 एकड़ भूमि एलपीएआई को हस्तांतरित कर दी गई है। वहीं आईसीपी बनबसा के लिए, भारत और नेपाल की ओर इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। इसे साल 2026 में चालू करने का भी प्रस्ताव है।
बता दें कि आईसीपी का संचालन लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एलपीएआई) द्वारा किया जाता है। यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है।