एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा आरटीआई के जरिए हासिल जानकारी में कस्टम विभाग ने बताया है कि 2012 में कई भारतीय कंपनियों ने भारी मात्रा में सोने का आयात किया था और उनमें से कई ने उस साल उस पर सीमा शुल्क अदा नहीं किया था। विभाग के अनुसार चौकसी के गीतांजलि जेम्स ने 750 किग्रा सोने के आइटम का आयात किया था। इसके अलावा गीतांजलि ज्वेलरी लिमिटेड ने 171 किग्रा और गिलि इंडिया लिमिटेड ने 182 किग्रा सोने का आयात किया था और उस पर एक पाई भी टैक्स नहीं भरा था।
वर्ष 2012 में चौकसी की कंपनियों ने 1103 किग्रा सोना और हीरा आयात किया। कस्टम विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इतनी भारी मात्रा में सोना बिना सीमा शुल्क चुकाए ही उसकी तिजोरियों में पहुंच गया। हैरानी की बात है कि कंपनी के रिकॉर्ड रजिस्ट्रार में गीतांजलि ज्वेलरी लिमिटेड नाम की कोई कंपनी ही नहीं है। उसके अस्तित्व का कोई सबूत नहीं है लेकिन उसने 171 किग्रा सोना आयात कर लिया।
जांच के नाम पर टरकाते रहे
मनोरंजन एस राय नामक उस सामाजिक कार्यकर्ता ने इन सूचनाओं के आधार पर आयकर महानिदेशक (जांच) को शिकायत की। वर्ष 2017 तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई। तत्कालीन आयकर महानिदेशक ने भी मामले को टरका दिया। राय को जिसके पास भेजा गया उसने
वित्त मंत्रालय के स्थानीय कार्यालय से संपर्क करने को कहा। इस तरह आज तक यह मामला जांच की रोशनी नहीं देख पाया है।
बिना टैक्स के 75 टन हीरा-सोने का आयात
आरटीआई खुलासे से पता चला है कि गीतांजलि ग्रुप के अलावा चोटी की तीन दर्जन ज्वेलरी कंपनियों ने 2012 में 75 टन सोने और हीरे और उसके आइटम आयात किए और उस पर कोई शुल्क अदा नहीं किया। इन कंपनियों ने जब इस हीरे और सोने के आभूषण को घरेलू बाजार में बेचा तो उस पर आयकर अदा किया या नहीं, उसकी कोई जानकारी नहीं है। यानी सिर्फ आयात शुल्क के रूप में ही नहीं बल्कि सरकारी खजाने को आयकर के रूप में भी भारी चपत लगाई गई है।
कंपनियों का कोई रिकॉर्ड नहीं
यह भी मालूम हुआ है कि भारी मात्रा में सोना और हीरा आयात करने वाली कई कंपनियां न तो कंपनी रजिस्ट्रार के यहां पंजीकृत थी और न ही
महाराष्ट्र सेल्स टैक्स विभाग में उनका कोई रिकॉर्ड मिला। कस्टम विभाग को जब इसकी शिकायत की गई तो जवाब मिला कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।