विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए मार्गरेट अल्वा की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने खुद को मतदान से अलग कर लिया। इसके बाद से विपक्षी एकता में फूट को लेकर चर्चे हैं। इस बीच विपक्ष की उपराष्ट्रपति पद (vice presidential election) की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा (margaret alva) ने शनिवार को बड़ा बयान दिया। अल्वा ने यह भी कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के उप राष्ट्रपति चुनाव से दूर रहने के फैसले से 'हैरान' हैं।
अल्वा ने जताई हैरानी
अल्वा ने कहा कि पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी विपक्ष को एकजुट करने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। अल्वा ने कहा कि वह भाजपा को जीतने में मदद नहीं कर सकती हैं। ममता बनर्जी के पास अपना विचार बदलने के लिए पर्याप्त समय है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल 2024 की चुनौती के लिए एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने गैर-भाजपा खेमे में मौजूदा मतभेदों को 'पारिवारिक झगड़ा' बताया।
विपक्ष नहीं चाहता है एकदलीय शासन
इस दौरान अल्वा ने कहा कि विपक्ष स्पष्ट है कि वह एक दलीय शासन नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा की जानी चाहिए। पूर्व में राज्यपाल रही अल्वा ने कहा कि आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था की 'त्रासदी'यह है कि लोगों का जनादेश प्रबल नहीं होता है। बाहुबल, धन बल और धमकियां निर्वाचित ढांचे की संरचना को बदल देती हैं।
उन्होंने संसदीय कार्यवाही में लगातार व्यवधानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अध्यक्ष उन समझौतों पर काम करने में असमर्थ हैं, जिनमें विपक्ष के दृष्टिकोण पर विचार किया जाता है। इस दौरान विपक्ष से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने वंशवाद की राजनीति पर कहा कि अक्सर राजनीति में राजनेताओं के बच्चों के आने पर सवाल खड़े होते हैं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन उन्हें चुनाव और लोगों का विश्वास जीतना पडेगा।
इससे पहले दिन में पार्टी के सांसद डेरेक ओ'ब्रॉयन ने कहा, हम मार्गरेट अल्वा का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह से उनका चुनाव हुआ हम उसके खिलाफ हैं। ब्रॉयन ने कहा, टीएमसी को कांग्रेस अपने बराबर का साझीदार मानकर कोई फैसला ले।
प्रेसवार्ता से 20 मिनट पहले दी गई सूचना
टीएमसी सांसद ने कहा, विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर प्रेसवार्ता से महज 20 मिनट पहले उन्हें बताया गया कि मार्गरेट अल्वा विपक्ष की ओर से उम्मीदवार होंगी। ब्रॉयन ने कहा, देश की सबसे पुरानी पार्टी के चुनाव सहयोगियों में राजद, राकांपा, शिवसेना, द्रमुक और माकपा जैसी पार्टियां हैं। हम सभी समान विचारधारा वाली पार्टी हैं, जिनका उद्देश्य भाजपा को हराना है। हालांकि, टीएमसी कांग्रेस की चुनाव सहयोगी पार्टी नहीं है। इसलिए टीएमसी को एक समान भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
ममता और धनखड़ के बीच हुआ गुप्त समझौता
मतदान से अलग रहने के टीएमसी के निर्णय के बाद कई तरह के सवाल भी खड़े होने लगे हैं। राकांपा प्रमुख शरद पवार का कहना है कि मार्गरेट अल्वा के नाम की घोषणा के समय ममता बनर्जी वहां पर मौजूद नहीं थीं, तो कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि भाजपा के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ और ममता बनर्जी के बीच एक गुप्त समझौते हुआ है।