कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की चर्चित किताब का गुरुवार को विमोचन हुआ। इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाए। तिवारी ने कहा कि 1965 की जंग में हमने लाहौर व इस्लामाबाद जीत लिए थे, लेकिन इंदिरा गांधी ने उन्हें लौटा दिया, लेकिन कश्मीर का मसला आज तक हल नहीं हो सका है।
तिवारी ने कहा कि इससे पता चलता है कांग्रेस राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। 26/11 (मुंबई हमले) के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक नहीं करने को लेकर तत्कालीन मनमोहन सरकार की आलोचना के मामले में सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि 26/11 को लेकर इस किताब में जो बातें कही गई हैं, उनका संदर्भ दूसरा है।
संयम को कमजोरी समझता है पाकिस्तान
कांग्रेस नेता ने कहा कि 26/11 संबंधी पैरे को यदि आप समग्रता से पढ़ेंगे तो समझ जाएंगे कि इसमें यह नहीं कहा गया है कि तत्कालीन यूपीए सरकार सुरक्षा को लेकर सख्त या नरम थी। उन्होंने कहा कि जब भी भारत ने सामरिक संयम बरता है तो पाकिस्तान कठोर बनकर सामने आया है, क्योंकि वह लगभग अर्द्ध सैन्य देश है। तिवारी ने कहा कि असल में पाकिस्तान भारत के संयम को उसकी कमजोरी समझता है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने
'10 फ्लैशपाइंट्स्: 20 ईयर्स-नेशनल सिक्युरिटी सिचुएशंस देट इम्पैक्ट इंडिया' किताब लिखी है। इसका गुरुवार को विमोचन किया गया।
उरी सर्जिकल स्ट्राइक से नहीं बदला पाक
अपनी किताब के लोकार्पण के मौके पर तिवारी ने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं हैं कि उरी हमले के बाद भारत की सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान गहरे सदमे में चला गया था। तिवारी ने कहा कि उरी हमले के बाद पुलवामा हमले को हमें नहीं भूलना चाहिए।
बैकफुट पर आ गई कांग्रेस
पिछले महीने तिवारी ने 26/11 हमले के बाद यूपीए सरकार द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं करने को लेकर कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने तत्कालीन मनमोहन सरकार की जमकर आलोचना की थी। इसके बाद कांग्रेस पार्टी बैकफुट पर आ गई थी।