पूर्वोत्तर पर एक बार फिर अशांति के बादल मंडरा रहे हैं। छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प के एक दिन बाद मणिपुर के राज्यपाल असम रवाना हो गए हैं। मणिपुर विश्वविद्यालय ने अगले आदेश तक सभी स्नातकोत्तर और स्नातक की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं।
पूर्वोत्तर भारत की स्थिति संवेदनशील है। नाजुक दौर से गुजर रहे मणिपुर के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य असम की राजधानी गुवाहाटी रवाना हो गए हैं। बता दें कि आचार्य के पास असम के साथ-साथ मणिपुर का भी अतिरिक्त प्रभार है। आचार्य बुधवार सुबह करीब 10 बजे गुवाहाटी रवाना हो गए। राज्यपाल की यात्रा के संबंध में अधिकारियों ने अधिक जानकारी नहीं दी है। राज्यपाल के गुवाहाटी जाने के साथ ही विश्वविद्यालय ने अगले आदेश तक सभी परीक्षाओं के स्थगित होने की बात कही है। बता दें कि मंगलवार को राजधानी इंफाल के बीटी रोड और काकवा क्षेत्र में सुरक्षाबलों पर पथराव की खबरें सामने आई थीं। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले प्रदर्शनकारी छात्रों को तितर बितर करने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे।
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सरकार मुद्दों के समाधान और पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध
नाजुक हालात के बीच मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इंफाल कॉलेज और इबोटोनसाना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रों से मुलाकात की। सीएम सिंह ने आश्वासन दिया कि सरकार राज्य के सभी मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आधिकारिक एक्स हैंडल पर युवाओं के मुद्दों का समाधान करने का वादा भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की आवाज अहम है और सरकार मिलकर मणिपुर का भविष्य बेहतर बनाने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री ने ड्रोन हमलों में मारे गए लोगों का जिक्र कर कहा, भले ही लंबा समय लगे, सरकार पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के प्रति प्रतिबद्ध है।
राजभवन के पास पहुंचे आक्रोशित छात्र, झड़प में 50 से अधिक घायल
गौरतलब है कि राजभवन के पास मंगलवार को हुई झड़प में 55 से अधिक छात्र और सुरक्षाकर्मी मामूली रूप से घायल हो गए। इसके बाद हालात नाजुक हो गए, जिससे निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात करना पड़ा। राजभवन के पास हुई झड़प के कुछ घंटों बाद राज्यपाल ने मंगलवार रात 11 छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी।
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16 महीने पहले जातीय हिंसा के कारण सुर्खियों में रहा मणिपुर
बता दें कि मणिपुर जातीय हिंसा के कारण लंबे समय तक अशांत रहा था। मई, 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बिगड़ते हालात को संभालने के लिए केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर सरकार के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ इंफाल जाकर बैठकें की थीं।