केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उस समय को याद किया जब भारत ने सदी की सबसे खतरनाक महामारियों में से एक का मुकाबला किया। मंडाविया ने कहा कि जब सरकार और लोग संकट से निपटने के लिए दिन-रात काम कर रहे थे, तो दवा निर्यात सहित कई मुद्दों पर बहुत सारी राजनीति हो रही थी, जिसमें विपक्षी दलों के द्वारा फर्जी कहानियां सामने रखी जा रही थीं।
मंडाविया ने कहा, मेरी एक बेटी डॉक्टर हैं और वह महामारी के दौरान लोगों की सेवा कर रही थीं। उन्होंने एक बार मुझे यह पूछने के लिए फोन किया कि क्या मैं वास्तव में जरूरी दवाओं का निर्यात कर रहा हूं, जबकि हमारे अपने देश में इसकी अनुपलब्धता है। इस बारे में खबरें थीं।' उन्होंने कहा, मैंने उनसे कहा कि देश में मोदी सरकार और मैं उनका मंत्री हूं। अगर देश में दवाओं की कमी होगी तो मैं कभी भी दुनिया को दवाओं का निर्यात नहीं कर सकता।
मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी को सही तस्वीर बताई और वह संतुष्ट थी। उन्होंने कहा, 'पूरे देश ने जब देखा कि दवाओं की कोई कोई कमी नहीं है तो उन्होंने इस बात पर भरोसा किया। हर किसी को पता चल गया कि मोदी सरकार ने कोविड संकट का प्रबंधन कैसे किया और इसके लिए चारों ओर प्रशंसा हो रही है।'
उन्होंने कहा, 'आज दुनिया भारत की ओर देखती है, भले ही यह (दवा आपूर्ति) महंगी हो जाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे जानते हैं कि संकट के समय भारत उनके साथ खड़ा है। यह हमारी प्रतिबद्धता के कारण है कि दुनिया भारत की प्रशंसा कर रही है और इसका श्रेय हमारे कोविड प्रबंधन को जाता है।' मंडाविया 2019 से बंदरगाहों, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के लिए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री थे। उन्हें 2021 में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के साथ-साथ रसायन और उर्वरक मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया था।