पुलिस ने किया अमोल शिंदे के घर का दौरा
लातूर के चाकुर तहसील के जरी गांव के निवासी अमोल शिंदे (25 वर्षीय) को हरियाणा के हिसार की नीलम (42 वर्षीय) के साथ उस समय गिरफ्तार किया गया, जब उन्होंने संसद भवन के बाहर से धुआं निकालने वाले छोटे टिन के डिब्बे खोले और 'तानाशाही नहीं चलेगी', 'भारत माता की जय' और 'जय भीम-जय भारत' के नारे लगाए। दिल्ली में हुई इस घटना के बाद लातूर पुलिस की एक टीम ने जरी गांव में उसके घर का दौरा किया।
बीएस स्नातक तक पढ़ाई कर चुका युवक
चाकुर के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अमोल शिंदे अनुसूचित जाति समुदाय से है और बीए स्नातक है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उसने पुलिस और सेना भर्ती परीक्षाओं की तैयारी के दौरान दिहाड़ी मजदूर के रूप में छोटे-मोटे काम किए। उन्होंने बताया कि शिंदे के दो भाई और माता-पिता भी दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। अधिकारी ने बताया कि अमोल के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि अमोल नौ दिसंबर को यह कहकर घर से निकला था कि वह सेना में भर्ती के लिए दिल्ली जा रहा है।
अधिकारी ने कहा कि उसने पहले भी इस तरह के भर्ती अभियानों में भाग लिया था, इसलिए उसके माता-पिता को यह असामान्य नहीं लगा। उन्होंने कहा कि अमोल के किसी राजनीतिक दल या आंदोलन से जुड़े होने की जानकारी नहीं है।
दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूदे दो लोग
संसद भवन के बाहर यह घटना उस समय हुई, जब कुछ ही मिनट पहले दो लोग दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए। इसके बाद उन्होंने छोटे टीन के डिब्बे खोल दिए, जिनसे एक जैसे रंग का धुआं निकल रहा था, जिससे सांसदों में दहशत फैल गई। ये दोनों घटनाएं ऐसे दिन हुई हैं जब देश 2001 के संसद हमले की बरसी मना रहा है।