पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस बार उन्होंने विद्युत (संशोधन) विधेयक- 2020 को केंद्र सरकार द्वारा फिर संसद में लाने के प्रयास का विरोध किया है। उन्होंने इस पर अपनी दोबारा आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विधेयक जन विरोधी है।
West Bengal CM Mamata Banerjee writes to PM Narendra Modi to "re-lodge protest against the Union Government's fresh move to place the much-criticized Electricity (Amendment) Bill, 2020 in Parliament" pic.twitter.com/6g8YC6k4DY
विद्युत संशोधन विधेयक का किसानों द्वारा भी विरोध किया जा रहा है। शुक्रवार को दिल्ली में जारी किसान आंदोलन के तहत चल रही किसान संसद में इस विधेयक के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। सरकार से विद्युत संशोधन विधेयक तत्काल वापस लेने की मांग की गई। किसान नेताओं का कहना है कि बिजली पर सभी वर्ग का मूल अधिकार है। सस्ती, पर्याप्त और उच्च गुणवत्ता बिजली की आपूर्ति, कृषि आजीविका के लिए किसानों के लिए जरूरी बताया गया। इससे डेयरी, आटा-चक्की सहित छोटे उद्यम भी वाणिज्यिक शुल्क के दायरे में होंगे। किसानों ने इस संशोधन से निजी बिजली कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा। बुनियादी सेवा के निजीकरण का किसानों के साथ साथ उपभोक्ताओं को भी महंगाई से जूझना पड़ेगा। विधेयक से किसानों और उपभोक्ताओं क्रॉस-सब्सिडी का लाभ मिलने में भी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। योजनाएं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी)होंगी, जिससे किसानों के लिए प्री पेड मीटर का प्रावधान होगा और सब्सिडी पूर्ण तौर पर समाप्त की जा सकती है।