मक्का मस्जिद बम विस्फोट मामले में हिंदुत्व उपदेशक स्वामी असीमानंद और चार अन्य आरोपियों को बरी घोषित करने के कुछ घंटे बाद ही इस्तीफा देने वाले जज का भविष्य अभी तय नहीं हुआ है। सोमवार को इस्तीफा देने वाले जज के. रविंदर रेड्डी के इस हैरान कर देने वाले कदम पर बुधवार को अटकलों का बाजार गर्म रहा। जज का इस्तीफा स्वीकार किया गया या नहीं, इस बात पर कोई अधिकारिक बयान नहीं देते हुए हैदराबाद हाईकोर्ट के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस मामले में सार्वजनिक तौर पर कुछ भी नहीं बोलने के निर्देश जारी हुए हैं।
हालांकि उन्होंने ये बात स्वीकार की कि ये मामला हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के स्तर पर चर्चा में आ गया है। चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायधीश रेड्डी ने महानगर सत्र न्यायधीश को भेजे अपने इस्तीफे में इस निर्णय के पीछे निजी कारण का हवाला दिया था, जिसे हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ‘पेचीदा’ करार दिया था।
2016 में हो चुके हैं निलंबित
हैदराबाद के जजों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि इस
एनआईए केस के विशेष जज के. रविंदर रेड्डी ने अपने इस्तीफे में तेलंगाना में अधीनस्थ अदालतों के लिए आंध्र प्रदेश के जजों के आवंटन का विरोध किया है। रेड्डी वर्ष 2016 में हाईकोर्ट के क्रोध का शिकार हुए थे, जब उन्होंने तेलंगाना के लिए अलग हाईकोर्ट स्थापित करने और आंध्र प्रदेश के रहने वाले जजों की पोस्टिंग नए राज्य की अधीनस्थ अदालतों में करने के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। तेलंगाना फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशन के एक सूत्र ने पुष्टि की कि रेड्डी उस प्रदर्शन में भाग लेने पर जून 2016 में निलंबित होने वले 11 अधीनस्थ अदालत जजों में शामिल थे। इस प्रदर्शन में तेलंगाना के वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों ने भी भाग लिया था। ये निलंबन एक महीने बाद खत्म कर दिया गया था।
रेड्डी की सुरक्षा बढ़ाई
मक्का मस्जिद बम विस्फोट में आरोपियों को बरी करने के बाद जज रेड्डी की सुरक्षा को खतरा माना जा रहा है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, सोमवार को आए निर्णय के बाद रेड्डी के निवास पर अगले कुछ दिनों के लिए अतिरिक्त पुलिस लगाकर सुरक्षा बढ़ाई गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई चेतावनी नहीं थी, लेकिन निर्णय को देखते हुए उनके घर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है।