पश्चिम बंगाल में प्रतिशोध की राजनीति हो रही है। यह आरोप है सत्ताधारी दल- तृणमूल कांग्रेस (TMC) का। महुआ मोइत्रा के ठिकानों पर हुई सीबीआई की तलाशी पर टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कहा, यह ज्वलंत मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है। आरोपों के बाद भाजपा ने तृणमूल पर पलटवार भी किया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताते हुए तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में प्रतिशोध की राजनीति हो रही है। लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा के ठिकानों पर छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य सांसद शांतनु सेन ने कहा, भाजपा जनता के बीच बढ़ रहे असंतोष को महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि मुद्दों से भटकाने के लिए हर संभव तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिशोध की राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है। प्रदेश विधानसभा में विपक्षी दल- बीजेपी ने तृणमूल के आरोपों को सिरे से खारिज कर पलटवार किया है।
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कथित कैश-फॉर-क्वेरी मामले में महुआ पर कार्रवाई के मामले में टीएमसी नेता शांतनु सेन ने कहा, भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को सूचित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा, जब आदर्श आचार संहिता लागू है, तो भाजपा अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों, सीबीआई और ईडी को हमारे उम्मीदवारों पर छापा मारने के लिए भेज रही है। चुनाव आयोग को इस पर गौर करना चाहिए।
इससे पहले सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने शनिवार को कोलकाता सहित कई स्थानों पर पूर्व टीएमसी सांसद मोइत्रा के परिसरों की तलाशी ली। अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमें शनिवार तड़के कोलकाता और अन्य शहरों में मोइत्रा के आवास पर पहुंचीं। तलाशी और सीबीआई के ऑपरेशन का विरोध कर रही टीएमसी के आरोपों को पश्चिम बंगाल भाजपा ने बेबुनियाद बताया है।
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पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा, 'जब भी ईडी या सीबीआई टीएमसी नेताओं पर छापा मारती है, तो वे चिल्लाते हैं और राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाते हैं।' उन्होंने कहा, महुआ मोइत्रा ने जो कुछ भी किया है वह लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है। टीएमसी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है, यही हकीकत है। लगभग हर नेता भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा है।
गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा को पिछले साल लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। संसदीय पैनल ने उन्हें कैश-फॉर-क्वेरी (संसद में सवाल के बदले पैसे) मामले में दोषी पाया था। खुद महुआ ने भी इस कार्रवाई को सदन में उनकी आवाज को दबाने का प्रयास और प्रतिशोध की राजनीति करार दिया था।