सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में चल रहा मराठा आरक्षण आंदोलन शनिवार को खत्म हो गया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया। इस दौरान शिंदे ने अपने संबोधन में कहा, 'मैंने जो वादा किया था, वो निभाया है।'
जरांगे के साथ बातचीत के बाद सरकार ने एक मसौदा अधिसूचना जारी की। जिसमें कहा गया कि यह अधिसूचना उन पर लागू होगी जिनके पास दिखाने के लिए यह रिकॉर्ड हैं कि वह कुनबी समुदाय से हैं। एक मराठा व्यक्ति के रक्त संबंधियों को भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री राणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट की। जिसमें उन्होंने कहा कि वह राज्य सरकार के फैसले और आरक्षण को लेकर मराठा समुदाय को दिए गए आश्वासन से सहमत नहीं है। उन्होंने कहा, इससे मराठा समुदाय को नुकसान होगा, जिसकी ऐतिहासिक विरासत है और यह अन्य पिछड़े समुदायों (के अधिकारों) पर कब्जा होगा। राणे ने कहा, इससे राज्य में अशांति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भी इस मुद्दे पर बात करेंगे।
वहीं, महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने भी राज्य सरकार के फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने मराठों को पीछे वाले दरवाजे से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल कराने को लेकर सवाल उठाया है। खेती-बाड़ी से जुड़ा कुनबी समुदाय ओबीसी श्रेणी में आता है। जरांगे पिछले साल अगस्त से मराठाओं के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं और उनके लिए कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ओबीसी की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, मराठाओं को बिना किसी सबूत के कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
दलबदल विरोधी कानून की समीक्षा के लिए नार्वेकर के नेृत्व में समिति गठित: बिरला
दलबदल विरोधी कानून की समीक्षा के लिए महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया है। यह घोषणा रविवार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान की।
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून उन विधायकों पर लगाम लगाने के लिए लागू किया गया था, जो बार-बार सियासी दलों का पाला बदलते हैं। यदि कोई चुना हुआ विधायक अपनी मर्जी से पार्टी को बदलता है या पार्टी के निर्देश के खिलाफ मतदान करता है, तो इस कानून के तहत उसे विधायिका से अयोग्य ठहराने का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के प्रावधान के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई चुने हुए सदस्य किसी अन्य पार्टी के साथ विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट दी जाती है।
बिरला ने कहा, दो दिवसीय सम्मेलन में पीठासीन अधिकारियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता से जोड़ने और उन्हें अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए कार्य योजना पर चर्चा की गई। लोकसभा अध्यक्ष ने राज्य और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोकतांत्रिक संस्थानों की संचार के चैनल स्थापित करने के सुझाव की सराहना की।