महाराष्ट्र में सत्ता जाने के बाद बगावत की आंधी में शिवसेना की सियासी जमीन भी खिसकती दिख रही है। साथ ही, शिवसेना का हिंदुत्व भी खतरे में है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले उद्धव ठाकरे ने कहा था कि उनके पास शिवसेना है। इसे उनसे कोई नहीं छीन सकता। लेकिन अब सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर शिवसेना है किसकी।
मगर सवाल यह है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें जो सहयोग शरद पवार और सोनिया गांधी से मिला क्या उस तरह का सहयोग सत्ता से बाहर होने के बाद मिलेगा। सत्ता की खातिर किए गए समझौते से शिवसेना की विचारधारा पहले ही कमजोर पड़ चुकी है। इसलिए ठाकरे को उनकी कट्टर हिंदुत्व की पहचान फिर से पाने में मुश्किलें आएंगी।
शिंदे को नहीं मानता शिवसेना का सीएम : उद्धव ठाकरे
सीएम पद से इस्तीफा देने के दो दिन बाद उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मीडिया के सामने आए और एकनाथ शिंदे को शिवसेना का मुख्यमंत्री मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगर वादा निभाया होता तो आज महाराष्ट्र में भाजपा का सीएम होता। एमवीए नहीं बनती। लेकिन अब भाजपा को क्या मिला। साल 2019 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उद्धव ने ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद की शर्त रखी थी और दावा किया कि अमित शाह ने उन्हें आश्वासन दिया।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अमित शाह को ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर अमल करना चाहिए था। अब शिंदे के सीएम बनने से भाजपा को क्या मिल गया। उद्धव ने कहा, सभी ने देखा कि मेरी पीठ में खंजर मारा गया। जिस तरीके से सरकार का गठन हुआ है, सीएम बनाया गया है, यह सम्मानजनक तरीके से हो सकता था।