महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह सुनिश्चित करने से रोका गया कि छोटे वाहनों को टोल शुल्क से छूट दी गई तो वे राज्य में टोल बूथों पर आग लगा देंगे। ठाकरे ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि टोल बूथ राज्य में नेताओं की आजीविका का साधन हैं।
उन्होंने कहा, 'मैंने अगले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलने का समय मांगा है। हम देखेंगे कि उस बैठक से क्या निकलता है, अन्यथा उपमुख्यमंत्री (देवेंद्र फडणवीस) के बयान को ध्यान में रखते हुए मनसे कार्यकर्ता हर टोल बूथ पर इकट्ठा होंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चार, तीन और दोपहिया वाहनों से टोल न वसूला जाए। अगर हमें रोका गया तो हम इन्हें आग लगा देंगे।'
ठाकरे रविवार को फडणवीस के उस बयान का जिक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि छोटे वाहनों को टोल देने से छूट दी गई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में सभी राजनीतिक दल सत्ता में आए हैं, लेकिन उनमें से किसी ने भी महाराष्ट्र को टोल मुक्त बनाने के अपने आश्वासन को लागू नहीं किया।
उन्होंने कहा, उन्हें हर दिन, हर हफ्ते और हर महीने टोल बूथ पर एकत्र किए गए पैसे से कुछ हिस्सा मिलता है। इसलिए, टोल बूथ कभी बंद नहीं होंगे और आपको कभी अच्छी सड़कें भी नहीं मिलेंगी। राज ठाकरे ने टोल बूथों पर एकत्र किए गए धन की आवाजाही के बारे में सवाल उठाए और पूछा कि एक ही कंपनी को टोल संग्रह के लिए अनुबंध क्यों मिलते रहते हैं।
ठाकरे की टिप्पणियों के जवाब में फडणवीस ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि 31 मई 2015 को प्रकाशित एक आदेश के जरिए राज्य में 12 टोल बूथ बंद कर दिए गए थे। बयान में कहा गया, '31 मई 2015 की आधी रात से लागू एक आदेश के जरिए 12 टोल बूथों को बंद कर दिया गया था। राज्य में लोक निर्माण विभाग के 38 टोल बूथ थे, जिनमें से 11 बंद थे। जबकि महाराष्ट्र सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के 53 टोल बूथ में से एक बंद था।'
उन्होंने बयान में कहा, पीडब्ल्यूडी और एमएसआरडीसी के अन्य 53 टोल बूथों पर कारों, जीपों और राज्य परिवहन की बसों को टोल का भुगतान करने से छूट दी गई है। टोल कंपनियों को मुआवजा देने का फैसला 2017 में लिया गया था और 31 अगस्त, 2017 को एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया गया था।