महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान
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संसद में वक्फ कानून में संशोधन विधेयक लाने की केंद्र सरकार की तैयारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि वक्फ बोर्ड की शक्तियों पर अंकुश लगाने को लेकर फर्जी बातें फैलाई जा रही हैं। सरकार मुसलमानों के लिए अच्छा करने जा रही है। सभी को मिलकर इसका स्वागत करना चाहिए। कानून में संशोधन से उनको दिक्कत है, जिनकी आजीविका वक्फ पर आधारित थी। वे मुसलमानों के ठेकेदार बन गए हैं, अब उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी। इनको मुसलमानों की कोई परवाह नहीं है। ठेकेदार एक बार मुसलमानों के घर में झांकें और देखें कि उनकी क्या हालत है?
उन्होंने कहा कि सरकार हमारी मां-बहनों को उनका हक देने जा रही है। सरकार ने यह नहीं कहा है कि यह मुसलमानों की संपत्ति है दूसरे समुदाय के व्यक्ति को दी जाएगी। हम सभी को मिलकर इसका स्वागत करना चाहिए और हमें सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना है। आज देश का विकास हो रहा है। सरकार हमारे बारे में सोच रही है। यह काफी अच्छी बात है।
वहीं शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इसकी किसी भी कैबिनेट मंत्री ने पुष्टि नहीं की है। मुझे लगता है कि इसे संसद में पेश किए जाने तक प्रतिक्रिया देना सही नहीं है। हम जानते हैं कि बीजेपी को पटरी से उतरने की आदत है। वे देश के गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नया हथकंडा लेकर आए हैं।
यह बदलाव करने जा रही सरकार
केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड की शक्तियों में कटौती करने की तैयारी में है। निकट भविष्य में वक्फ बोर्ड पहले की तरह किसी भी संपत्ति को स्वेच्छा से अपनी संपत्ति नहीं घोषित कर पाएंगे। उन्हें अपने बोर्डों में महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। मोदी सरकार सोमवार को लोकसभा में वक्फ बोर्ड अधिनियम-1954 में संशोधन के लिए विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। विधेयक के मसौदे पर कैबिनेट की मुहर लग चुकी है। विधेयक पेश होने से पहले भाजपा सहयोगियों को साधने में जुट गई है।