मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जारांगे ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय को कोटा देने के लिए विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुला सकती है। मनोज जारांगे कोटा की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे हैं और शुक्रवार को उनकी भूख हड़ताल का तीसरा दिन है। जारांगे ने सरकार पर ये भी आरोप लगाया कि अगर सरकार कोटा देने के लिए गठित की गई समिति का कार्यकाल बढ़ाती है तो इसका मतलब है कि वह कोटा नहीं देने की साजिश कर रही है।
जारांगे ने सरकार पर लगाए आरोप
मनोज जारांगे महाराष्ट्र के जालना जिले में अपने पैतृक गांव अंतरवाली साराती में भूख हड़ताल कर रहे हैं। वहीं पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मनोज जारांगे ने समुदाय को कोटा देने के लिए विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि हमने सरकार को 40 दिन का समय दिया था और साथ ही मराठा कोटा पर अपना पक्ष रखते हुए कई जरूरी सबूत भी सरकार को दिए थे। अब अगर सरकार इस दिशा में काम कर रही समिति के कार्यकाल को विस्तार देने का फैसला करती है तो इसका मतलब होगा कि सरकार मराठाओं को कोटा ना देने की साजिश रच रही है।
विपक्षी नेताओं से की ये अपील
जारांगे ने विपक्षी और सत्ताधारी नेताओं से अपील की है कि वह उनसे मिलने उनके गांव ना आएं और अपने घरों पर रहें। जारांगे ने कहा कि नेताओं के आने से कानून व्यवस्था बिगड़ती है इससे अच्छा है कि वह अपनी-अपनी विधानसभाओं में मराठाओं को आरक्षण देने के लिए आवाज बुलंद करें। जारांगे ने सीएम शिंदे के दिल्ली दौरे पर तंज कसा और आरोप लगाया कि राज्य के प्रमुख नेताओं ने पीएम मोदी को महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए हो रहे आंदोलन की जानकारी ही नहीं दी थी। उल्लेखनीय है कि जारांगे ने सितंबर में भी मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी। यह विरोध प्रदर्शन 29 अगस्त को शुरू हुआ था और 14 सितंबर को सीएम शिंदे से मुलाकात के बाद खत्म हो गया था।
सीएम से मुलाकात के बाद जारांगे ने 40 दिन की डेडलाइन तय की थी। वह डेडलाइन 24 अक्तूबर को समाप्त हो गई। अब जारांगे ने फिर से भूख हड़ताल शुरू कर दी है और कहा कि 29 अक्तूबर को आगे की रणनीति पर फैसला किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने रिटायर्ड जज संदीप शिंदे की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यों की समिति गठित की है, जो राज्य में मराठा आरक्षण पर सरकार को सुझाव देगी।