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सत्ता गंवाने के NDA के लिए यह हैं मायने, महाराष्ट्र चुनावी चंदे के लिए अहम

Wed, 27 Nov 2019 09:56 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महाराष्ट्र की दलीय स्थित - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में मचे सियासी घमासान के बाद भाजपा के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार का गिर जाना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानि एनडीए के लिए किसी झटके से कम नहीं है। आइए जानते हैं इस पूरी सियासी उठापटक से एनडीए को हुए नुकसान या यूं कहें की सत्ता गंवाने के क्या मायने हैं। 

दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की वजह से पहले से ही एनडीए सत्ता से दूर है। हालांकि, दिल्ली में फरवरी 2020 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं महाराष्ट्र में घटे सियासी घटनाक्रम के बाद अब इस आर्थिक राजधानी में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई है। 
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संसद के सेंट्रल हॉल का नजारा - फोटो : पीटीआई
एनडीए का साल 2017 में 72 फीसदी आबादी पर शासन था। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सत्ता उसके हाथ से जाने पर वह 41 फीसदी आबादी तक सीमित होकर रह गया है।
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NDA - फोटो : Amar Ujala
हालांकि, मिजोरम और सिक्किम जैसे छोटे राज्य एनडीए के खाते में आए हैं। इस तरह से अब 17 राज्यों में एनडीए सरकार है। इनमें से 13 राज्यों में भाजपा और चार राज्यों में सहयोगी दलों के मुख्यमंत्री हैं।

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modi and yogi - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा 48 लोकसभा सीटें महाराष्ट्र में हैं। यही वजह है कि एनडीए के लिए महाराष्ट्र काफी अहम है। भाजपा तमिलनाडु में सरकार के साथ है, लेकिन विधायक एक भी नहीं है।
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शरद पवार और उद्धव ठाकरे - फोटो : पीटीआई
महाराष्ट्र में सत्ता गंवाने के क्या हैं मायने
बता दें कि महाराष्ट्र की कुल जीडीपी करीब 30 लाख करोड़ रुपए है। यह देश की जीडीपी का 14 फीसदी हिस्सा है। देश के 40 फीसदी से ज्यादा कॉर्पोरेट ऑफिस महाराष्ट्र में ही हैं। इस लिहाज से पार्टियों को मिलने वाले चुनावी चंदे में इस राज्य का बड़ा अहम योगदान है। ऐसे में यहां सत्ता से बाहर होना पार्टी की साख और अब तक चले आ रहे सफलता के रथ पर ब्रेक लगाने का काम कर सकता है।

 
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electoral bond
भाजपा को मिला 743 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 20,000 रुपये से अधिक के दान में 743 करोड़ रुपये मिले। यह राशि कांग्रेस समेत छह राष्ट्रीय दलों को प्राप्त हुई चंदे की राशि से तीन गुना अधिक है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्तूबर को चुनाव आयोग के सामने दायर हलफनामे में भाजपा ने इस बात का खुलासा किया था।

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