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उत्तराखंड और महाराष्ट्र की संस्कृति में काफी समानता- कोश्यारी

Sat, 07 Nov 2020 07:56 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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भगत सिंह कोश्यारी
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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने उत्तराखंड दिवस के मौके पर मुंबई में रह रहे उत्तराखंडी हस्तियों का सम्मान किया। यह सम्मान समारोह मुंबई की समाजिक व सांस्कृतिक संस्था अभियान की तरफ से आयोजित की गई। इस दौरान राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने कहा कि महाराष्ट्र और उत्तराखंड की भाषा और संस्कृति में साम्य दिखाई पड़ता है। धार्मिक आस्था के साथ भाषाई समानता व लोक संस्कारों में भी दोनों राज्य एक जैसे हैं।

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उत्तराखंड दिवस के उपलक्ष्य में मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र की अगुवाई में  मुंबई की सामाजिक सांस्कृतिक संस्था अभियान के माध्यम से राजभवन में समारोह आयोजित किया गया। शनिवार को हुए इस समारोह में मुंबई में रह रहे उत्तराखंड की श्रीमती सुशीला कानपुडे, शिव सिंह रौतेला, स्वरुपचंद पोखरियाल, रतनमणि अंथवाल, मीनाक्षी भट्ट, महावीर सिंह बिष्ट  समेत अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी, पत्रकार विनोद तिवारी, पत्रकार केशरसिंह बिष्ट आदि विभिन्न क्षेत्र की कुल 9 विशिष्ट हस्तियों को राज्यपाल कोश्यारी ने सम्मानित किया।

9 नवम्बर 2000 को तत्कालीन प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने नए उत्तराखंड प्रदेश का गठन किया था। इसलिए अभियान संस्था ने सभी सम्मानितजनों को अटल जी की प्रतिमा भेंट की।  इस दौरान अमरजीत मिश्र ने देवभूमि उत्तराखंड को कला और संस्कृति का भंडार बताते हुए देशभक्ति की अटूट आस्था का केंद्र बताया।

उत्तराखंड के लोग कर्मठ, मेहनत के बल पर पा लेते हैं मुकाम - कोश्यारी

राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने इस सम्मान समारोह में महाराष्ट्र व उत्तराखंड की सामाजिक - सांस्कृतिक दर्शन में एकरूपता पर प्रकाश डाला। उत्तराखंड और उत्तराखंडियों के बारे में राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लोग कर्मठ होते हैं। इसलिए जहां भी जाते हैं, वहां अपनी मेहनत और ईमानदारी से अपना मुकाम पा लेते हैं। गांव में भी उत्तराखंड के लोग अपने लिए रोजगार के विकल्प खोज लेते हैं। इसलिए उत्तराखंड में भुखमरी जैसी स्थिति कभी नहीं आई. गांवों में भी उत्तराखंड के लोग पक्के मकानों में रहते हैं और उन्हें किसी चीज की कोई कमी नहीं होती।

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कोरोना काल में भी उत्तखंडियों ने जरूरतमंदों की मदद कर उन्हें घर पहुंचाया। अलग राज्य बनने के बाद बहुत कम समय में उत्तराखंड ने बहुत तरक्की कर ली है। उत्तराखंडी जहां भी जाते हैं, अपना पहाड़ साथ लेकर चलते हैं। मुंबई में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडी भी मुंबई में अपना पहाड़ बसाए हुए हैं। पृथक उत्तराखंड राज्य के संघर्ष में मुंबई में बसे प्रवासी उत्तराखंडियों का भी बहुत बड़ा योगदान है।

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