सौ करोड़ की उगाही मामले में प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेजे गए महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की दिवाली इस बार कस्टडी में ही बीतेगी। मनी लॉन्ड्रिंग निषेध कानून विशेष अदालत ने मंगलवार को छह नवंबर के लिए देशमुख को ईडी को सौंप दिया। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने एनसीपी नेता देशमुख की 14 दिन की हिरासत मांगी थी। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच करने के लिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत है।
इस मामले में हुई है गिरफ्तारी
सौ करोड़ की वसूली के आरोप में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई द्वारा 21 अप्रैल को देशमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद ईडी ने भी इसकी जांच शुरू की थी। ईडी का आरोप है कि देशमुख ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री रहते हुए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और बर्खास्त पुलिसकर्मी सचिन वाजे के जरिये मुंबई में विभिन्न बार और रेस्तरां से 4.70 करोड़ रुपये से अधिक जमा किए। देशमुख ने हालांकि आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि एजेंसी का पूरा मामला एक दागी पुलिस अधिकारी के दुर्भावनापूर्ण बयानों पर आधारित है।
देशमुख को मिलेगा घर का खाना, दवा
अदालत ने ईडी की कस्टडी में देशमुख को घर का खाना और दवा लेने की इजाजत दे दी। साथ ही, देशमुख से पूछताछ के दौरान वकील भी मौजूद रहेंगे, लेकिन वकील केवल देशमुख को देख सकेंगे। उनकी आवाज नहीं सुन सकेंगे। कोर्ट में देशमुख के वकील ने उन्हें हिरासत में भेजे जाने का विरोध किया। वकील विक्रम चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल सीबीआई को देशमुख के खिलाफ आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था। ईडी से जांच के लिए नहीं कहा।
अनिल देशमुख को ईडी ने पांच बार पूछताछ के लिए समन जारी किया था, लेकिन वह बीमारी और लंबी उम्र का बहाना बनाकर गायब थे। हर बार उनके वकील इंद्रपाल सिंह ही दफ्तर पहुंचते थे। उनकी दलील थी कि देशमुख 75 साल के हैं और महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से वे पेश नहीं हो सकते। 1 नवंबर को ईडी दफ्तर पहुंचे देशमुख से 13 घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
कई विवादों में फंस चुके हैं देशमुख
ईडी ने बताया कि देशमुख की तरफ से किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा था ऐसे में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलवार को कस्टडी के लिए उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा । अनिल देशमुख का विवादों से पुराना नाता रहा है। वह भ्रष्टाचार के अलावा आय से अधिक संपत्ति रखने और गृहमंत्री रहते अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले में भी आरोपी हैं।
सीबीआई को मिल चुके हैं कई सुराग
करीब दो महीने पहले 17 सितंबर 2021 को अनिल देशमुख के मुंबई और नागपुर के कुछ ठिकानों पर छापा मारा था। 100 करोड़ की वसूली मामले की जांच हाथ में आते ही CBI की अलग-अलग टीमों ने अनिल देशमुख के मुंबई और नागपुर स्थित आवास और कार्यालयों और कॉलेज समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें नागपुर की टीम के हाथ महत्वपूर्ण सुराग लगे थे। सीबीआई कई बार देशमुख के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।
ईडी कर बार भेज चुका था समन
100 करोड़ की वसूली मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कई बार देशमुख के खिलाफ समन भेज चुका था, लेकिन देशमुख ईडी के सामने पेश नहीं हो रहे थे। ईडी ने अनिल देशमुख के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया फिर भी वह सामने नहीं आ रहे थे। एक नवंबर को अचानक वह ईडी दफ्तर पहुंचे। 13 घंटों की पूछताछ के बाद ईडी ने संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
आयकर विभाग भी कस चुका है शिकंजा
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इनकम टैक्स विभाग ने भी अनिल देशमुख के खिलाफ कार्रवाई की थी। आईटी की टीमों ने नागपुर और मुंबई स्थित आवास और कॉलेज समेत कई ठिकानों पर दबिश दी थी। इसके साथ ही आयकर विभाग ने उनके करीबी और रिश्तेदारों के घर पर भी छापा मारा था।
अनिल देशमुख पर ये हैं आरोप
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने करीब ढाई महीने पहले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि अनिल देशमुख ने ही मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वझे को हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली का टारगेट दिया था। हालांकि, अनिल देशमुख ने आरोपों से इंकार किया था, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से सीबीआई जांच के आदेश के बाद देशमुख को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।