राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने गुरुवार को विपक्षी भाजपा पर महाराष्ट्र के लिए बाढ़ राहत पैकेज को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में सहयोगी दल एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने एक बयान में आरोप लगाया कि भाजपा राहत पैकेज को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। बता दें कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पैकेज की घोषणा की थी।
तापसे ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने 701 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है, लेकिन यह 2020 में बाढ़ प्रभावित लोगों (महाराष्ट्र में) के लिए है। इसका मतलब है कि केंद्र ने लगभग एक साल बाद राहत राशि दी है। हालांकि, भाजपा लोगों को गुमराह कर रही है कि सहायता उन लोगों के लिए है जो पिछले सप्ताह बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इसका मतलब है कि कुल 3701 करोड़ रुपये की राहत राशि में से केंद्र ने 701 करोड़ रुपये ही मंजूर किए हैं।
उन्होंने कहा कि अब तक केंद्र ने किसी सहायता की घोषणा नहीं की है। नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है और राज्य सरकार जल्द अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देगी। यहां के रत्नागिरि, रायगढ़ जिले, तटीय कोंकण क्षेत्र, कोल्हापुर व सतारा जिले बाढ़ और भारी बारिश के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यहां कई जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं भी हुई हैं। राज्य में पिछले सप्ताह हुई बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 213 लोगों की मौत हो चुकी है।
महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को पार्टी विधायकों से राज्य में बारिश और बाढ़ से संबंधित राहत कार्यों के लिए पार्टी संचालित कोष में अपना एक महीने का वेतन जमा करने की अपील की।
सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन का नेतृत्व कर रही शिवसेना ने मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) के बजाय पार्टी के कोष में चंदा लेने का कदम उठाया है, जिससे विवाद पैदा होने की संभावना है। सीएमआरएफ के तहत, मुख्यमंत्री के पास चिकित्सा सहायता के लिए धनराशि स्वीकृत करने या संकट में लोगों की मदद करने का विवेक है।
महाराष्ट्र में भाजपा के विधायक पहले ही अपना एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने की घोषणा कर चुके हैं। शिवसेना द्वारा मीडिया में प्रसारित एक संदेश में कहा गया है कि विधायकों से दान की अपील मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के निर्देशों के अनुसार की जा रही है, जो एक मंत्री भी हैं। संदेश शिंदे और शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु के माध्यम से दिया गया है।
जिस खाते में विधायकों को पैसा जमा करना है, उसका नाम 'शिवसेना मददनिधि' (राहत कोष) है और यह मुंबई के दादर इलाके में भवानी सहकारी बैंक लिमिटेड की शाखा में है। शिवसेना के पदाधिकारी और खाता संभालने के काम के प्रभारी प्रवीण पंडित ने कहा, यह सच है कि पार्टी ने धन जुटाने का फैसला किया है और मंत्रियों सहित अपने विधायकों को अपना एक महीने का वेतन बैंक खाते में दान करने के लिए कहा है। पार्टी की ओर से मैं अपने विधायकों को दान प्रक्रिया में मदद करूंगा। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह कोई नई कवायद नहीं है। हमने इसे पहले भी किया है।